- 10 से 17 वर्ष के बच्चों से अमानवीय परिस्थितियों में कराया जा रहा था काम, 200 रुपये तक साप्ताहिक मजदूरी
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। राजधानी के गांधी नगर इलाके में बाल श्रम के खिलाफ कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने सिलाई-कढ़ाई और आर्टिफिशियल ज्वैलरी बनाने वाली नौ फैक्ट्रियों से 19 बच्चों को मुक्त कराया है। इनमें एक नाबालिग लड़की भी शामिल है। आरोप है कि उत्तर प्रदेश और बिहार से लाए गए इन बच्चों से पिछले आठ महीनों से अमानवीय परिस्थितियों में काम कराया जा रहा था। मामले में बुधवार को एफआईआर दर्ज की गई।
एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन से मिली सूचना के आधार पर एसडीएम, श्रम विभाग, दिल्ली पुलिस और बाल अधिकार संगठनों के जेआरसी नेटवर्क की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। इस दौरान नियमों का उल्लंघन कर संचालित नौ फैक्ट्रियों को सील कर दिया गया और उनके मालिकों को गिरफ्तार किया गया।
जांच में सामने आया कि बच्चों से लंबी शिफ्ट में काम कराया जाता था। इसके बदले उन्हें महज 10, 50 या 200 रुपये साप्ताहिक दिए जाते थे। आरोप है कि 10 साल के एक बच्चे को पूरे दिन काम करने के बदले केवल 10 रुपये मिलते थे। कई बच्चे फैक्ट्रियों के भीतर ही सोने को मजबूर थे।
एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के राष्ट्रीय संयोजक धनंजय टिंगल ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और बच्चों के उचित पुनर्वास की मांग की है। मेडिकल जांच के बाद सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति के निर्देश पर बाल गृह भेज दिया गया। गांधी नगर थाने में संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने आगे की जांच शुरू कर दी है।