राजधानी में सार्वजनिक परिवहन सेवा में सबसे महत्वपूर्ण बस सेवा की हालत खस्ता है। बीते डेढ़ साल में दिल्ली की सड़कों से 2400 से अधिक पुरानी बसें हट चुकी हैं, लेकिन इस औसत में नई बसें नहीं आई हैं। इससे यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बसों की संख्या लगातार घटती जा रही है, जबकि इलेक्ट्रिक बसें उसकी भरपाई नहीं कर पा रही हैं। मार्च तक 1680 बसें और सड़कों से हटने वाली हैं। यदि उनकी जगह नई बसें नहीं लाई गईं तो सार्वजनिक परिवहन की स्थिति की हालत और खराब होनी तय है। जनवरी 2024 में दिल्ली में करीब 8240 बसें थीं, जिनमें 6940 सीएनजी व 1300 इलेक्ट्रिक बसें शामिल थीं। जुलाई 2025 तक कुल बसों की संख्या घटकर 5835 पर आ गई। इसमें सीएनजी बसें सिर्फ 2920 बची हैं, जबकि इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़कर 2915 हो गई।
15 जुलाई 2025 को दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टीमॉडल ट्रांजिट सिस्टम (डिम्ट्स) के अधीन संचालित 533 सीएनजी बसों का अनुबंध समाप्त हो गया। इस कारण 16 जुलाई से ये बसें सड़कों से हट गईं। साथ ही जुलाई के अंत तक दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (डीटीसी) की 452 पुरानी बसें भी हटाई जा सकती हैं। इस तरह सिर्फ जुलाई में ही करीब 985 बसें दिल्ली की परिवहन व्यवस्था से बाहर हो रही हैं। दिल्ली परिवहन निगम ने आंकड़ों के अनुसार जून में 96, मई में 232 और अप्रैल में 111 बसें हटाई गईं हैं। वहीं, फरवरी से मार्च के बीच कुल 793 बसें हट चुकी हैं। मार्च 2025 में ही 345 बसें हटी थीं जो कि बसों की संख्या में सबसे बड़ी मासिक कटौती रही।
1700 से अधिक बसें हटेंगी
बेड़े में चल रही सीएनजी बसें पुरानी हो चुकी हैं। विशेष अनुमति पर बसों का संचालन हो रहा है। सितंबर में 462, अक्तूबर में 84, नवंबर में 15 और दिसंबर में 99 बसें हट जाएंगी। उसके बाद जनवरी 2026 में 57, फरवरी में 20 और मार्च में 2 बसें हट जाएंगी। यानी अगले आठ महीने में 1680 और बसें सड़कों से हटेंगी। अगले वित्त वर्ष में अप्रैल से दिसंबर 2026 के बीच 29 और बसें हटेंगी। कुल मिलाकर आने वाले समय में करीब 1700 और बसें हटाई जाएंगी। मौजूदा समय में राजधानी में रोजाना करीब 40 लाख यात्री बसों में सफर करते हैं। अभी दिल्ली की सड़कों पर डीटीसी व डिम्ट्स के अधीन कुल 5835 बसें चल रही हैं।
11000 से अधिक बसों की है जरूरत
दिल्ली सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक बसों की संख्या को बढ़ाने की योजना योजना बनाई है, लेकिन जब तक सीएनजी की तरह बड़ी क्षमता वाली बसें पर्याप्त संख्या में नहीं आतीं, तब तक यात्रियों की समस्या दूर नहीं होगी। परिवहन विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार छिकारा के मुताबिक दिल्ली को 11,000 से अधिक बसों की फ्लीट चाहिए। वर्तमान में बसों की संख्या जरूरत के अनुसार आधी भी नहीं है।