कैशलेस इंडिया बनाने की मुहिम में अब शहर के 150 ऑटो डिजिटल हो गए है। डिजिटल होने के प्रमाण के तहत चालकों ने अपने ऑटो पर स्टिकर लगा रखे हैं, ताकि लोग ऑटो किराया के लिए यह तरीका अपनाए।
120 ऑटो के डिजिटल होने के बाद अन्य ऑटो चालक भी डिजिटल की राह पकडने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि नए वर्ष 2017 की शुरूआत के साथ डिजिटल भुगतान लेने वाले ऑटो की संख्या में बढ़ोतरी होगी।
फरीदाबाद शहर में करीब 15 से 18 हजार की संख्या में ऑटो चल रहे है। जिनका किराया दस रुपये से शुरू होता है। ऐसे में बड़े स्तर पर डिजिटल भुगतान का तरीका अपनना थोड़ा मुश्किल जरूर है, लेकिन ऑटो चालकों ने समय की मांग को देखते हुए अपनी तरफ से कोशिश शुरू कर दी है।
शहर में ऑटो चलाने वाले आशीष मिश्रा बताते है कि शहर में ऑटो चालक पेटीएम से भुगतान ले रहे हैं। कुछ लोग आते है, जिनके पास नकद भुगतान नहीं होता है। वह क्यू आर कोड एवं मोबाइल नंबर से पैसा सेंड कर रहे हैं। मैसेज के माध्यम से किराया मिलने की जानकारी मिल रही है।
आशीष मिश्रा को डिजिटल की जानकारी होने पर फरवरी 2016 में इस एप का प्रयोग करना शुरू कर दिया था। पेटीएम के स्टिकर को देखने के बाद अब अन्य ऑटो चालक भी इससे जुडने के प्रति रूचि दिखा रहे हैं।
सिर्फ एक प्रतिशत ऑटो जुड़े पेटीएम से
शहर में ऑटो चलाने वाले कम पढ़े लिखे होने के साथ स्मार्टफोन नहीं चलाते हैं, जिससे डिजिटल एप से नहीं जुड़ पा रहे है। ऐसे में अब तक सिर्फ संख्या एक प्रतिशत तक पहुंच पाई। शहर में ऑटो चलाने वाले राजू ने बताया कि मेरे पास स्मार्टफोन नहीं है। पेटीएम को कैसे चलाते हैं, इसकी अभी जानकारी नहीं है।
ऑटो परिवहन का प्रमुख साधन
मेट्रो स्टेशन से आने एवं मेट्रो तक पहुंचने के लिए ऑटो परिवहन का प्रमुख साधन है। ऑटो के डिजिटल होने से कैशलेस व्यवस्था करने में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। शहर में 15 हजार ऑटो में जनवरी 2017 तक एक प्रतिशत संख्या बढ़कर तीन प्रतिशत होने की उम्मीद की जा रही है।