-यमुना प्रदूषण रोकने में लापरवाही पर डीपीसीसी की बड़ी कार्रवाई
-यह कार्रवाई राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेश के बाद की गई
-डीपीसीसी द्वारा जुलाई 2025 से अक्टूबर 2025 के बीच किए गए निरीक्षण में पाया गया कि कई संयंत्र निर्धारित पर्यावरण मानकों को पूरा नहीं कर रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। यमुना में बढ़ते प्रदूषण और दुर्गंध को रोकने में नाकाम रहने वाले दिल्ली के 15 सीवेज शोधन संयंत्रों (एसटीपी) पर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने 2 करोड़ 89 लाख 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश के बाद हुई है। यह मामला उस समय सामने आया था जब फरवरी 2024 में एक मीडिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि दिल्ली के लगभग 75 प्रतिशत सीवेज शोधन संयंत्र यमुना नदी की गंदगी और बदबू को नियंत्रित करने में असफल हैं। इसके बाद एनजीटी ने स्वतः संज्ञान लेते हुए डीपीसीसी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।
डीपीसीसी द्वारा जुलाई 2025 से अक्टूबर 2025 के बीच किए गए निरीक्षण में पाया गया कि कई संयंत्र निर्धारित पर्यावरण मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं। जांच में बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी), केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (सीओडी), टोटल सस्पेंडेड सॉलिड्स (टीएसएस) और फीकल कोलीफॉर्म जैसे महत्वपूर्ण मानकों में गंभीर गड़बड़ियां मिलीं। डीपीसीसी के अनुसार, कई संयंत्रों में अल्ट्रावॉयलेट डिसइंफेक्शन सिस्टम लगे होने के बावजूद फीकल कोलीफॉर्म की मात्रा तय सीमा से काफी अधिक पाई गई। इससे साफ है कि संयंत्रों की शोधन व्यवस्था ठीक से काम नहीं कर रही थी।
इन पर लगा जुर्माना : सबसे अधिक जुर्माना दिल्ली जल बोर्ड के संयंत्रों पर लगा है। यमुना विहार चरण-1 और चरण-3 संयंत्रों पर 29-29 लाख रुपये का दंड लगाया गया। वहीं मोलरबंद, वसंत कुंज (पुराना) चरण-1, वसंत कुंज (नया) चरण-2 और महरौली संयंत्रों पर 27 लाख 60 हजार रुपये-27 लाख 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। ओखला चरण-5 संयंत्र पर 20 लाख 80 हजार रुपये का दंड लगा है। इसके अलावा सोनिया विहार संयंत्र चलाने वाली कंपनी अयप्पा केशोपुर ट्रीटमेंट प्राइवेट लिमिटेड पर 18 लाख रुपये तथा कापसहेड़ा संयंत्र के लिए त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर भी 18 लाख रुपये का जुर्माना लगा। घिटोरनी संयंत्र पर 25 लाख रुपये, दिल्ली गेट नाला संयंत्र पर 17 लाख 40 हजार रुपये और कोंडली चरण-2 एवं 3 पर 11 लाख रुपये का दंड लगाया गया। सेन नर्सिंग होम नाला संयंत्र पर भी 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
कारण बताओ नोटिस जारी : डीपीसीसी ने बताया कि 22 दिसंबर 2025 को सभी संबंधित संयंत्रों और संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद जवाबों और जांच रिपोर्ट के आधार पर पर्यावरण मुआवजा तय किया गया। डीपीसीसी के अतिरिक्त निदेशक डॉ. अनवर अली खान द्वारा दाखिल शपथ पत्र में कहा गया है कि समिति लगातार सभी संयंत्रों की निगरानी कर रही है और नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि यमुना नदी में गंदे पानी का प्रवाह रोकना प्राथमिकता है और इसके लिए नियमित जांच की जा रही है। डीपीसीसी ने यह भी जानकारी दी कि एनजीटी के निर्देश पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली को सभी परीक्षण रिपोर्ट और आवश्यक आंकड़े उपलब्ध करा दिए गए हैं।