अच्छे दिनों की आस लगाए गाजियाबादियों को सर्विस टैक्स की मार ने बेजार कर दिया। महंगाई से राहत और सौगातों की उम्मीदें लगाए शहरवासियों को निराशा ही हाथ लगी।
सर्विस टैक्स में 1.76 फीसदी की बढ़ोतरी ने किचन से लेकर इलाज तक के बजट में इजाफे का इंतजाम कर दिया है।
उस पर तुर्रा यह कि भविष्य में स्वच्छ भारत मिशन के लिए लोगों को सर्विस टैक्स में दो फीसदी की अतिरिक्त बढ़ोतरी के लिए भी मानसिक रूप से तैयार रहना होगा।
भले ही वित्त मंत्री इसे भविष्य का बजट बता रहे हों, फिलहाल तो लोगों को एक अप्रैल से अपनी जरूरतों का बजट नए सिरे से बनाना पड़ेगा। हालांकि बजट से उद्यमियों को कुछ राहत मिली है तो रीयल एस्टेट की हालत और खराब हुई है।
आयकर सीमा में छूट, होम की दरों में कटौती, महंगाई से राहत समेत कई राहत वाली घोषणाओं की उम्मीद में लोग सुबह से ही आम बजट के इंतजार में थे।
लोगों ने इंडिया-यूएई मैच से ज्यादा बजट को तरजीह दी। सर्विस टैक्स 12.36 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत करने की घोषणा से लोगों का उत्साह ठंडा पड़ा गया।
अब मोबाइल बिल, डाटा प्लान, रेस्टोरेंट-होटल में खाना, ब्यूटी पार्लर, बैंक्वेट हॉल, बिजली बिल, टेलीफोन बिल, ऑनलाइन रेल टिकट बुकिंग, जरूरी वस्तुओं की कीमतें, निजी अस्पतालों में इलाज, दवाइयां आदि महंगा हो जाएगा।
सर्विस टैक्स का यह अंतर मध्य वर्ग के लोगों के मासिक बजट में हजार से लेकर दो हजार रुपये की चपत लगाएगा।