दिल्ली में वसंत विहार गैंगरेप के बाद गृह मंत्रालय ने सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तीन महीनों में जीपीएस से निगरानी करने के आदेश दिए थे, लेकिन एक साल बाद भी राजधानी में निगरानी नहीं हो रही है।
डीटीसी बसों में जीपीएस इंस्टॉल तो हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। कॉमनवेल्थ गेम्स के समय डीटीसी बेड़े से जुड़ी बसों में जीपीएस इंस्टॉल किए गए थे और उसकी निगरानी का काम डिम्ट्स को सौंपा गया था।
जीपीएस निगरानी के लिए ट्रांसपोर्ट विभाग डिम्ट्स को बाकायदा रकम भी देता था, लेकिन पैसे के लेनदेन को लेकर अक्सर विवाद होता रहा है। पैसा न देने पर डिम्ट्स निगरानी बंद कर देता था।
हालांकि मुख्य विवाद डिम्ट्स की रिपोर्ट पर डीटीसी की आपत्तियों से शुरू हुआ था। लगभग 6 महीनों से योजना पूरी तरह बंद हो गई है। इस दौरान 1200 से अधिक बसों से जीपीएस चोरी भी हो गए हैं। जीपीएस लगाने का मुख्य फायदा बस को ट्रेस करना, चालक रूट न तोड़ सके और ट्रिप पूरे करवाना था, लेकिन इन तीनों में से किसी पर भी काम नहीं हुआ।