फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक-दो नहीं, इस घर में हैं 11 बेटियां जो बनीं मिसाल

विज्ञापन
विज्ञापन
भिवानी की फोगाट बहनें बबिता एवं गीता आपको याद हैं। उन्होंने तमाम मिथकों और धारणाओं को दरकिनार करते हुए कुश्ती में लोहा मनवाया है।
विज्ञापन


ठीक वैसी ही हैं मेवात की 11 बहनें। जिन्होंने तमाम वर्जनाएं तोड़कर आला तालीम हासिल कर इलाके में अपनी अलग पहचान बनाई है।

हरियाणा के सबसे पिछड़े मेवात में लड़कियों की शिक्षा का बुरा हाल है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अभी चल रही हरियाणा बोर्ड की परीक्षा में सबसे कम छात्राएं मेवात से शामिल हुई हैं।

2011 की जनगणना के अनुसार इस जिले की महिला साक्षरता दर 24.26 फीसदी है, जो प्रदेश में सबसे कम है। अधिवक्ता नूरूद्दीन नूर कहते हैं कि मुस्लिम बहुल इलाका होने के कारण बच्चियों की शिक्षा का विशेष इंतजाम नहीं होने से बहुत कम मां-बाप अपनी लड़कियों को आगे पढ़ाने को राजी होते हैं।
विज्ञापन

विज्ञापन

पिता की मौत के बाद भी नहीं हारी हिम्मत

शिक्षा को लेकर ऐसे माहौल में मेवात के चंदैनी गांव के रियाज खान ने एक मिसाल कायम की है। वह पंजाब वक्फ बोर्ड में रेवेन्यू कलेक्टर थे। चार साल पहले उनका इंतकाल हुआ है।

इसके बावजूद परिवार की लड़कियों के आला तालीम देने की यह परंपरा अब उनकी दो बड़ी बेटियों नफीसा और शबनम ने संभाल रखी है। दोनों बहनें सरकारी स्कूल में टीचर हैं।

रियाज की आठवीं पुत्री अना रियाज बताती हैं कि उनकी चार बहनाें ने इसलिए टीचर बनना जरूरी समझा कि वो लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित कर सकें। वह बताती हैं कि प्राय: अभिभावक उनसे अपनी बच्चियाें को आला तालीम दिलाने के बारे में राय लेने आते हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें