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10वीं फेल दिव्यांग ने 8000 लोगों से की करोड़ों की ठगी, 10 साल से कर रहा था फर्जीवाड़ा

Thu, 23 Jul 2020 06:17 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • विशेष तरह के सॉफ्टवेयर की मदद से 10 साल कर रहा था फर्जी इंश्योरेंस
  • खुद को नामी कंपनी का बताता था एजेंट, सभी तरह के इंश्योरेंस करता था
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गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दसवीं फेल दिव्यांग ने करीब 8000 लोगों का फर्जी इंश्योरेंस कर करोड़ों की ठगी कर ली। आरोपी खुद को एक नामी इंश्योरेंस कंपनी का एजेंट बताता था और विशेष तरह के सॉफ्टवेयर की मदद से पिछले 10 वर्षों से फर्जीवाड़ा कर रहा था। मौर्या एंक्लेव थाना पुलिस ने मामले में करोड़ों रुपये की ठगी की आशंका जताई है। 

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पकड़े गए आरोपी की पहचान जहांगीरपुरी निवासी कैलाश (38) के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी के पास से एक लैपटॉप, दो पेन ड्राइव बरामद कर एफएसएल लैब भेज दिया गया है। जहां उसके डाटा की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि उसने कितने लोगों से ठगी की है। आरोपी ने पुलिस से पूछताछ में करीब 8000 लोगों से ठगी का दावा किया है। 

उत्तर-पश्चिम जिले की पुलिस उपायुक्त विजयंता आर्या ने बताया कि 18 जुलाई को पुलिस ने नईमुद्दीन नामक ऑटो चालक और सवारी का मास्क नहीं लगाने पर चालान किया। पुलिस ने जब ऑटो चालक के कागजातों की जांच तो उसे इंश्योरेंस पर कुछ शक हुआ। 
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नईमुद्दीन से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि इंश्योरेंस उसने इसी साल 5 जून को कैलाश नामक शख्स से 6400 रुपये में कराया है। इंश्योरेंस कंपनी के कस्टमर प्रतिनिधि से बात की गई तो इंश्योरेंस फर्जी मिला। मौर्या एंक्लेव थाना पुलिस ने फौरन अलग मामला दर्ज कर आरोपी कैलाश की तलाश शुरू कर दी। 

मंगलवार को जहांगीरपुरी इलाके से उसे दबोच लिया। आरोपी पैदाइशी दिव्यांग है। 10वीं में फेल होने के बाद उसने कंप्यूटर पर एक विशेष तरह का सॉफ्टवेयर डलवाने के बाद उसे चलाना सीखा। बाद में खुद को एक नामी इंश्योरेंस कंपनी का एजेंट बताकर वर्ष 2010 से इंश्योरेंस करने लगा। 
आरोपी इंश्योरेंस करने के बदले 5 से 10 हजार रुपये लेता था। 10 साल में वह करीब 8000 लोगों से करोड़ों रुपये ठग चुका है। आरोपी ने करीब 65 लाख रुपये की ठगी की बात कबूल कर ली है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वह कोई भी इंश्योरेंस करवाए तो उसकी जांच अच्छी तरह कर लें।

काम नहीं मिला तो करने लगा फर्जीवाड़ा
नई दिल्ली। पुलिस की पूछताछ में कैलाश ने बताया कि 10वीं फेल होने के बाद कंप्यूटर सीख लिया। उसे कहीं कोई काम नहीं मिला। वर्ष 2010 में सोनू नामक एक युवक ने उसे फोटोशॉप से फर्जी कागजात बनाना सिखा दिया। कैलाश ने सोचा कि भीख मांगने से अच्छा है कि वह फर्जी इंश्योरेंस करना शुरू कर दे। वह कंप्यूटर की मदद से बिल्कुल असली लगने वाला इंश्योरेंस पेपर तैयार कर लेता था। कैलाश के परिवार में माता-पिता के अलावा भाई और भाभी है। उसकी शादी नहीं हुई है।

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