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मुआवजे के लिए 100 करोड़ का कर्ज लिया

Sat, 03 Dec 2016 01:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा

सार

सोमवार से मुआवजा बांटेगा यमुना प्राधिकरण
पतंजलि उद्योग को देनी है 455 एकड़ जमीन
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जमीन - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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यमुना प्राधिकरण ने कादलपुर के किसानों को जमीन का मुआवजा देने के लिए बैंक से 100 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। यह जमीन पतंजलि उद्योग को दी जानी है। प्राधिकरण के मुताबिक, पतंजलि उद्योग को 455 एकड़ भूमि दी जानी है। यह जमीन तीन सेक्टरों में हैं।
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पहला प्लॉट 130 एकड़ का सेक्टर-24 जबकि दूसरा प्लॉट सेक्टर-24ए में है। ये दोनों औद्योगिक भूखंड हैं। वहीं तीसरा संस्थागत भूखंड सेक्टर-22ई में है। सेक्टर-24 और 24ए में कुछ जमीन का अतिरिक्त मुआवजा किसानों को अभी तक नहीं दिया गया है।

अब पतंजलि को जमीन देनी है। इस वजह से प्राधिकरण ने जल्द मुआवजा देकर जमीन पर कब्जा लेने की तैयारी शुरू कर दी है। प्राधिकरण सोमवार से मुआवजा बांटना शुरू करेगा। साथ ही मौके पर पजेशन भी लेता रहेगा ताकि बाद में कोई दिक्कत न हो।
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प्राधिकरण के सीईओ डॉ अरुणवीर सिंह ने कहा कि एक तरफ किसानों को मुआवजा देना है तो दूसरी तरफ पतंजलि को जमीन। इस रकम से दोनों की जरूरतें पूरी हो जाएंगी। वहीं, यमुना एक्सप्रेसवे के पैरलल 60 मीटर रोड बनाने के लिए पांच गांवों की जमीन चाहिए।

जिसके लिए प्राधिकरण ने प्रशासन को मुआवजे का पैसा पहले ही दे दिया है। प्रशासन ने प्राधिकरण से यह ब्योरा मांगा था कि जिन किसानों ने जमीन पर पजेशन देने की सहमति दे दी है उनकी सूची उपलब्ध करा दी जाए, जिससे शीघ्र मुआवजा बांटा जा सके। गौरतलब है कि करौली बांगर, भाईपुर, महमूदपुर खेड़ा, तिरथली व मेहंदीपुर के किसानों से जमीन लेकर सड़क का निर्माण पूरा कराया जाना है।

तीन संस्थाओं को जमीन
यमुना प्राधिकरण ने तीन संस्थाओं के लिए जमीन आवंटित कर दी है। इनमें एक शिरडी साईं संस्था ने ली है। सेक्टर-22ई में 8100 वर्ग मीटर प्लॉट है। दो प्लॉट वृद्धाश्रम के लिए है। दोनों 1000-1000 वर्गमीटर के प्लॉट हैं। इनका आवंटन कर दिया गया है। सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने कहा कि सामाजिक योगदान को ध्यान में रखते हुए इन संस्थाओं को प्लॉट दिए जा रहे हैं।

यमुना सिटी में प्रस्तावित मंडी अधर में
यमुना सिटी में प्रस्तावित मंडी अधर में लटकती दिख रही है। इसकी दो वजह है। पहला यह कि मंडी परिषद 400 एकड़ जमीन एक रुपये की लीज पर चाहता है, जबकि प्राधिकरण ने यह जमीन सहमति के आधार पर क्रय कर रहा है।

किसान 64 फीसदी मुआवजा चाहते हैं, जबकि प्राधिकरण सहमति के आधार पर जमीन देने वाले किसानों को अतिरिक्त मुआवजा नहीं देना चाह रहा। दूसरी वजह यह है कि 400 एकड़ जमीन में से प्राधिकरण के पास सिर्फ 150 एकड़ जमीन ही है। 250 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने के लिए पैसों की कमी है। फिलहाल प्राधिकरण के अधिकारी भी इस पर कुछ नहीं बोल रहे।
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