100 करोड़ रुपये की ड्रग्स के साथ पकड़े गए पांच विदेशी आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद सनसनीखेज खुलासा हुआ है। आरोपी कामेनी फिलिप, फिलिप उर्फ टॉल, एडोर, इबे चिनेडू ऑस्टिन उर्फ एलिनवा उर्फ विक्टर और केलेची से पूछताछ में पता चला है कि वे लोग कोलंबिया और मेक्सिको से शुद्ध कोकीन मंगाते हैं। भारत में उसमें पैरासिटामोल की टैबलेट व अन्य कैमिकल्स मिलाकर मात्रा बढ़ाकर बेचते थे। आरोपी कोकीन मंगाने के लिए भारतीय महिलाओं का इस्तेमाल करते थे। ये खुलासा भारत में इस गिरोह के सरगना कामेनी फिलिप ने किया है।
अपराध शाखा के पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरोह के सदस्य पहले नाइजीरियन महिलाओं से ड्रग्स मंगाते थे, मगर सुरक्षा एजेंसियों को उन पर ज्यादा संदेह होने पर ड्रग्स पकड़ी जाती थी। अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त हर्ष इंदौरा ने बताया कि इस सिंडिकेट के सरगना पश्चिमी अफ्रीका निवासी कालिस के एक फर्जी सेल कंपनी का पता लगा है। ड्रग्स के बदले में आया पैसा हवाला के जरिए इस कंपनी में जाता था। आरोपी ड्रग्स में ऐसे केमिकल्स मिलाते थे, जिसका सेवन करने से लोगों को इस ड्रग्स की लत लग जाए।
सरगना की कंपनी में हवाला से ऐसे जाता था पैसा
अपराध शाखा के अधिकारियों के अनुसार नाइजीरिया में काफी संख्या में भारतीय रहते हैं। वह अपने देश पैसा भेजते हैं। मनी एक्सचेंजर सिंडिकेट के सदस्यों को भारत में पैसा पहुंचाने के लिए कहते थे। भारत में मौजद सिंडिकेट गिरोह के सदस्य ड्रग्स को बेचने के बाद आई रकम को यहां देते थे। बदले में नाइजीरिया में भारतीय जो पैसे देते थे वह सरगना की कंपनी में जमा करवा दिया जाता था। पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी की सेल कंपनी में 85 करोड़ रुपये की नाइजीरियन करेंसी जमा कराने के सबूत मिल चुके हैं। आरोपियों के मोबाइल में मौजूद स्क्रीन शॉट व रजिस्टर से पता लगा है।
पार्सल के जरिए बाहर जाती थी एमडीएमए
पुलिस अधिकारियों के अनुसार शुद्ध कोकीन बाहर से भारत में आती थी। भारत में से एमडीएमए बाहर भेजते थे। इस तरह की कोकीन भारत में नहीं बनती है, इस कारण बाहर से मंगाते थे। आरोपी गुरुग्राम, दिल्ली व नोएडा समेत पूरे भारत में ड्रग्स की सप्लाई करते थे।
ऐसे करते थे सप्लाई
सिंडिकेट ने एक फ़ूड डिलीवरी एप-शैली वितरण मॉडल अपनाया, जो ग्राहकों के वास्तविक स्थानों के आधार पर डिलीवरी भेजता था। डिलीवरी एजेंट एक समान ड्रेस कोड का पालन करते थे। ये चेकदार शर्ट और काले हेलमेट पहनते थे ताकि सामान सौंपते समय ग्राहकों की पहचान सुनिश्चित हो सके। सिंडिकेट ने भारत में स्थानीय एमडीएमए निर्माण इकाइयां स्थापित कीं और अंतरराष्ट्रीय कोरियर सेवाओं का उपयोग कर ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, मलयेशिया, जापान और यूनाइटेड किंगडम सहित देशों में इस पदार्थ का निर्यात किया।