ट्वीट करने के महज तीन घंटे बाद पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की दिल का दौरा पड़ने से हुई मौत से पूरा देश आश्चर्य और शोक में है। हर कोई इसे नियति बता रहा है। हालांकि चिकित्सा विज्ञान इसकी वजह कम जागरूकता, पर्याप्त संसाधन न होने और समय पर उपचार न मिलने को मानता है।
दिल का दौरा यानी कार्डिएक अरेस्ट आने से हृदय थम जाता है। पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने के कारण शरीर में रक्त संचार भी रुक जाता है। पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को लेकर तो नहीं, लेकिन डॉक्टरों ने कार्डिएक अरेस्ट को लेकर बातचीत में कहा कि दिल का दौरा पड़ने के बाद हर मिनट मरीज मौत की ओर बढ़ता है। 3 से 5 मिनट के बाद उसे बचाना मुश्किलों भरा हो जाता है। हालात ये हैं कि देश में सालाना होने वाली मौतों में 10 फीसदी हिस्सेदारी कार्डिएक अरेस्ट की है।
इंडियन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, देश में दिल का दौरा बुजुर्गों के बाद युवावस्था के लोगों को गिरफ्त में ले रहा है। आधुनिक जीवनशैली इसके पीछे बड़ी वजह है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसे रोगों के अलावा धूम्रपान इसे बढ़ावा दे रहे हैं। दिल्ली के हृदयरोग विशेषज्ञों का दावा है कि दिल का दौरा पड़ने के शुरुआती 10 मिनट में सीपीआर चुनिंदा मरीजों को ही मिल पाता है। यानी 90 फीसदी से ज्यादा लोगों को सीपीआर देरी से या बिल्कुल ही नहीं मिल पाता।
जीबी पंत अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. प्रेम अग्रवाल ने कहा कि उनके अस्पताल में हर दिन कोई न कोई मरीज कार्डिएक अरेस्ट का आता है। कई बार मरीजों को बचा लिया जाता है, लेकिन ज्यादातर मरीज काफी देर बाद अस्पताल पहुंचने के कारण नहीं बच पाते। उधर, मैक्स अस्पताल के डॉ. रजनीश मल्होत्रा का कहना है कि कार्डिएक अरेस्ट होने के बाद शुरुआती 3 से 5 मिनट में सीपीआर मिलना बेहद जरूरी है।
जैसे-जैसे समय निकलता जाएगा, मरीज के बचने की संभावना भी उतने फीसदी कम होती जाती है। ऑनलाइन चिकित्सा सलाह देने वाले लायब्रेट की वर्ष 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, देश की करीब 2 फीसदी आबादी को ही पता है कि सीपीआर कैसे दिया जाता है। विकसित देशों में हर दूसरे व्यक्ति को सीपीआर देने का प्रशिक्षण दिया जाता है।
एम्स के वरिष्ठ डॉ. संदीप सेठ का कहना है कि जागरूकता और समय समय पर जांच कराते रहने से इस स्थिति को काफी हद तक नियंत्रण में लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दिल का दौरा किसी को भी पड़ सकता है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप के रोगियों और धूम्रपान करने वालों में इसकी आशंका कई गुना रहती है। इसलिए इन लोगों को न सिर्फ अपने रोग, बल्कि जीवनशैली को लेकर भी सतर्क रहना चाहिए। साथ ही रोज व्यायाम या योग करना बेहद जरूरी है।