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एफडी तोड़कर महिला के खाते से निकाले 10 लाख, नेट बैंकिंग के जरिये दिया वारदात को अंजाम 

Mon, 09 Nov 2020 06:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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यदि आप यह सोचते हैं कि बैंक में रखा आपका रुपया सुरक्षित है तो यह बात अपने दिमाग से निकाल दें। फर्श बाजार इलाके में बदमाशों ने एक महिला के खाते से उनकी दो एफडी ऑन लाइन तुड़वाकर 10.22 लाख रुपये उड़ा लिये। बदमाशों ने महिला के खाते से अटैच उनके नंबर को चुपचाप बदलवा दिया। इसके बाद पीड़िता के नाम से एटीएम में निकलवा लिया। 

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बाद में आठ लाख से अधिक एक ज्वेलर के खाते में आरटीजीएस कर दिए गए। बाकी रुपयों को सात बार में एटीएम से निकाल लिया गया। पीड़िता बैंक पहुंची तो उनको ठगी का पता चला। पीड़िता सरला ने बैंक के कर्मचारियों व अधिकारियों पर मिली भगत का आरोप लगाया है। फर्श बाजार थाना पुलिस ने सरला की शिकायत पर रविवार को मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।

पुलिस के मुताबिक सरला परिवार के साथ ज्ञानलोक कालोनी, जीटी रोड, सिकंदराबाद, बुलंदशहर में रहती हैं। पिछले करीब 10 सालों से इनका शाहदरा अनाज मंडी स्थित एसबीआई में बचत खाता है। इनके खाते में 14 हजार रुपये मौजूद थे। जबकि करीब 10.50 लाख रुपये की इन्होंने दो एफडी करवाई हुई थीं। 17 अक्तूबर को वह सिकंदराबाद से बैंक पासबुक अपडेट करवाने आई। पासबुक अपडेट हुई तो उनके होश उड़ गए। किसी ने उनके खाते से 10.22 लाख रुपये उड़ा लिये थे। 
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बैंक अधिकारियों से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि दोनों एफडी को नेट बैंकिंग के जरिये तुड़वा लिया गया। इसके बाद किसी ज्वेलर को अगस्त में दो अलग-अलग तारीख पर 3.88 लाख और 4.37 लाख रुपये आरटीजीएस किए गए। इसके अलावा बदमाशों ने सात अलग-अलग बार एटीएम से रुपये भी निकाले। जांच में पता चला कि हेराफेरी करने से पूर्व किसी ने उके खाते से अटैच मोबाइल नंबर भी बदलवा लिया।

पीड़िता का आरोप है कि न तो उन्होंने खाते से अटैच मोबाइल नंबर को बदलवाया और न ही उन्होंने कभी नेट बैंकिंग की। उनके पास मौजूद दोनों एटीएम कार्ड भी बंद रखे हैं। सरला ने आरोप लगाया कि वारदात में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों का हाथ है। उनकी मौजूदगी में कैसे नंबर बदल दिया गया। इसके अलावा एटीएम कार्ड किसी और के घर कैसे पहुंच गया। वहीं बैंक ने बिना पड़ताल के नेट बैंकिंग की सुविधा कैसे दे दी। अपनी शिकायत में सरला ने पुलिस अधिकारियों से गुजारिश की है कि वह बैंक अधिकारियों से पूछताछ करें। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पूरे मामले की जांच कराने की बात कर रहे हैं।

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