विशेषज्ञों के मुताबिक वैसे तो जीका वायरस से होने वाली बीमारी डेंगू या मलेरिया की तरह होती है। ज्यादातर मरीजोें में यह अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन गर्भवती महिलाओं पर इस वायरस का खतरा ज्यादा देखा गया है। वैज्ञानिक शोधों में यह बात सामने आई है कि जीका वायरस की वजह से गर्भवती के पेट में पल रहे बच्चों पर खासा असर पड़ा और बच्चे शारीरिक विकृतियों के साथ पैदा हुए।
युगांडा से शुरू हुआ था जीका वायरस
दुनिया में पहली बार जीका वायरस को साल 1947 में अफ्रीका महाद्वीप के देश युगांडा के बंदराें में पाया गया था। युगांडा के जीका के जंगलों में रहने वाले बंदरों में पाए जाने की वजह से इसका नाम जीका वायरस पड़ा। साल 1952 में यह बंदराें से होते हुए इंसानों तक पहुंच गया। इसके बाद यह तंजानिया से होते हुए अफ्रीका, अमेरिका होते हुए तमाम देशोें में फैल गया। भारत में राजस्थान, बिहार व यूपी समेत कई राज्यों में इसके मरीज सामने आ चुके हैं।
- मरीज के शरीर में गंभीर दर्द होता है। खासकर घुटनों व कोहनी में ज्यादा दर्द होता है।
- आंखों के पीछे वाले हिस्सों में दर्द होता है।
- मरीज को थकावट महसूस होती है।
- मरीज को कभी भयंकर ठंडी तो कभी पसीना होने लगता है।
- आंखें लाल हो जाती हैं।
- मरीज को उल्टी होने लगती है।
- मरीज को गंभीर सिरदर्द होता है।