जून 2013 की केदारनाथ आपदा के कई किस्से सबने देखे, पढ़े और उन्हें महसूस भी किया, लेकिन उस खौफनाक मंजर और बचाव एवं राहत कार्य के कई पहलू अब भी अनछुए हैं।
जान की बाजी लगाकर लोगों को आपदा से बचाया
इन्हीं में से एक किस्सा है उस वक्त निजी विमान सेवा में काम कर रहे योगिंद्र राणा का। राणा ने उस दैवी आपदा के वक्त अपनी जान की बाजी लगाकर आपदा प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों की जान बचाई, लेकिन उनके इस साहस को सलाम तो दूर किसी ने सराहा तक नहीं।
हालांकि, केदारनाथ आपदा में राहत एवं बचाव कार्य के लिए शौर्य चक्र हासिल कर चुके विंग कमांडर निखिल नायडू ने हाल ही में रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन को पत्र लिखकर योगिंद्र राणा को उचित सम्मान देने की पैरवी की है। बता दें कि बचाव कार्य में राणा नायडू के साथ जुड़े थे।
बीते साल आई आपदा से पहले तक योगिंद्र राणा गिरीदेव एविएशन में बेस ऑपरेशन मैनेजर का काम कर रहे थे। 17 जून की शाम हेलीकॉप्टर से रामबाड़ा तक पहुंचे इसी वायुयान सेवा कंपनी के कैप्टन भूपिंद्र और योगिंद्र राणा ने अपनी आंखों से तबाही का मंजर देखा।
18 जून से निजी हेलीकॉप्टर से जंगल चट्टी, रामबाड़ा, गरुड़ चट्टी पहुंच लोगों को बचाने का काम किया। योगिंद्र जमीन से करीब पांच- सात फुट ऊपर रुके हेलीकॉप्टर से कूदकर चॉपर के उतरने के लिए जगह बनाता और फिर हेलीकॉप्टर उतरता। ऐसा एक दिन में 20-20 बार होता। 21 जून को सेना मदद के लिए आई।
ध्रुव हेलीकॉप्टर की रिकार्ड उड़ान भरने वाले विंग कमांडर निखिल नायडू ने योगिंद्र राणा को साथ लेकर बचाव के लिए उड़ान भरी। हेलीकॉप्टर से रस्सी के सहारे नीचे उतरने (विंच डाउन) का अनुभव न होने के बाद भी राणा ने विंच डाउन कर कई लोगों को बचाया।
जंगल चट्टी से करीब 200 लोगों को बाहर निकाला
हद तो यह रही कि इस काम को करने से पहले नायडू ने राणा को बीमा कवर देने की बात की थी पर प्रशासन ने कोई प्रावधान न होने की बात कही। बावजूद राणा ने इस काम को अंजाम दिया। जंगल चट्टी से करीब 200 लोगों को बाहर निकाला और यह सिलसिला 22 जून तक जारी रहाब्य।
बेगारी के भी दिन देखने पड़े
हद तो यह रही कि आपदा के बाद निजी वायु सेवा कंपनियों का काम बंद होने के बाद राणा को काफी समय बेगारी की हालत में गुजारना पड़ा। बावजूद राणा की ओर किसी ने ध्यान तक देना उचित नहीं समझा।
हालांकि अब कुछ दिनों से राणा नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) से जुड़कर केदारनाथ में पुनर्निर्माण का कार्य कर रहे हैं, वह भी इसलिए क्योंकि राणा ने निम से प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
केदारनाथ के लिए 17 जून की शाम को जब उड़े थे तो रामबाड़ा, जंगल चट्टी का हाल देख रौंगटे खड़े हो गए थे। हालांकि हम बेहतरी से बचाव कार्य कर सके। अब केदारघाटी को संवारने में भी काम करने का मौका मिल रहा है।
- योगिंद्र राणा