देहरादून की बिजली व्यवस्था को स्मार्ट बनाने के लिए ऊर्जा निगम पिछले पांच साल में करोड़ों रुपये खर्च कर चुका है, लेकिन अभी भी दून में बिजली व्यवस्था स्मार्ट नहीं हो पाई है। आज भी दूनवासियों को बिलों में गड़बड़ी, बिजली क टौती, ट्रांसफर फुंकने की समस्या, लो-वोल्टेज की समस्या, बिजली कनेक्शनों के लिए भागदौड़ आदि समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
हल्की सी बारिश या तूफान में शहर की बत्ती घंटों गुल रहने की समस्या से निजात नहीं मिल सकी है। फॉल्ट ठीक करने में घंटों लग जाते हैं। घरों, सड़कों के ऊ पर झूलते तार आज भी जस की तस हैं।
बिजली लाइनों को अंडर ग्राउंड करने, स्मार्ट मीटर, कटौती मुक्त बिजली की व्यवस्था, कनेक्शन लेने की ऑनलाइन व्यवस्था, मीटरिंग व बिलिंग में पारदर्शी व्यवस्था की कवायद अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाई है।
विभाग कर रहा इस कामों का दावा
-बिजलीघरों की क्षमता वृद्धि।
-बिजलीघरों में पैनल बदले।
-33 केवी लाइनों के ब्रेकर बदले।
-33 केवी लाइनों की क्षमता वृद्धि।
-स्केडा कंट्रोल रूम का निर्माण।
-कई जगह कम क्षमता के ट्रांसफार्मरों की जगह उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मर लगाए।
-200 किमी से अधिक एबीसी लाइनें बनाने।
-जीआईएस बिजलीघर का निर्माण।
जो कार्य रह गए अधूरे
-बिजली लाइनों को अंडर ग्राउंउ की कवायद।
-स्मार्ट मीटर लगाने का काम।
-सभी घरों में प्रीपेड मीटर की व्यवस्था।
-घरों के ऊपर से हाईटेंशन लाइनों को हटाने का काम।
-कनेक्शन लेने की प्रक्रिया ऑनलाइन करने।
-रीडिंग, मीटरिंग की पारदर्शी व्यवस्था।
दून में लोगों को निर्बाध रूप से बिजली मिले इसके लिए एपीडीआरपी योजना के तहत कई काम किए गए हैं। इसके तहत लाइनों की क्षमता वृद्धि, उच्च क्षमता के ट्रांसफर लगाने, फॉल्ट को जल्दी ढूंढ़ने के लिए स्केडा कंट्रोलरूम की स्थापना आदि के कार्य किए गए हैं। जो काम अधूरे हैं, उन्हें भी जल्द पूरा किया जाएगा।
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शैलेंद्र सिंह, अधीक्षण अभियंता, दून