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अब बेटे की टिकट को हुई यशपाल की नाराजगी

Thu, 17 Nov 2016 11:43 AM IST
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून
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यशपाल आर्य - फोटो : अमरउजाला
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विभिन्न मुद्दों पर सीएम से नाराजगी को लेकर चर्चा में रहने वाले यशपाल आर्य इस बार अपने बेटे संजीव आर्य को नैनीताल से टिकट देने में आनाकानी पर त्यौरियां चढ़ाए हैं।
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इस बार भी उनके नाम पर कोई ठोस आश्वासन न मिलते देखकर उन्हें आपे से बाहर होते बताया जा रहा है। कहा तो यह भी जा रहा है कि यशपाल इस मुद्दे को दिल पर लेकर कोई बड़ा कदम भी उठा सकते हैं। उनके करीबी लोगों का कहना है कि वर्ष-2012 में नैनीताल विधानसभा सीट से टिकट दिए जाने के लिए संजीव की दावेदारी प्रबल थी, मगर महिलाओं को आगे लाने की बात कहते हुए उन्हें अगली बार टिकट दिए जाने का आश्वासन देकर टरका दिया गया।

हालांकि यशपाल इन बातों को सिरे से नकार रहे हैं। उन्होंने कहा कि कैंडीडेट के बारे में फीडबैक लिया जाए। यदि उसमें संजीव जिताऊ नजर आते हों तो टिकट दिया जाना चाहिए। वर्ष 2012 के चुनाव में संजीव को टिकट दिए जाने के पक्ष में ग्राम प्रधान से लेकर नगर पालिका परिषद के चेयरमैन और कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने जोरदार पैरवी की थी। कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सर्वे में भी उनकी दावेदारी प्रबल थी।
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यहां तक कि किसी अन्य व्यक्ति ने टिकट की पेशकश तक नहीं की थी। मगर उस वक्त महिलाओं को टिकट देने की बात कहते हुए सरिता आर्य को टिकट दे दिया गया। तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते यशपाल अपने बेटे की बहुत पैरवी नहीं कर पाए। मगर इस बार वे इस मामले में समझौते के मूड में नहीं हैं।

सत्ता के करीबियों की मानें तो बीते दिनों यशपाल ने मुख्यमंत्री को साफ-साफ कहा कि संजीव को नैनीताल से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ाया जाए। चुनाव जीतने की अपनी रणनीति की भी विस्तृत चर्चा उन्होंने सीएम के साथ की। चर्चा तो यह भी है कि उन्होंने संजीव को टिकट न दिए जाने की सूरत में कोई बड़ा फैसला लेने तक की घुड़की दी है।

उधर यशपाल आर्य का कहना है कि यदि वर्ष 2012 में भी संजीव को टिकट दिया जाता तो वह जीत सकता था। पार्टी चाहें तो आज भी सर्वेक्षण करा ले। उन्होंने टिकट के संबंधी में पैरवी करने या नाराजगी की बात से इंकार किया है। अन्य किसी दल से बातचीत को लेकर बातों को भी मात्र भ्रामक प्रचार करार दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी जो फैसला करेगी, वे उन्हें मंजूर होगा।
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