यही स्थिति वर्ष 2025 की भीषण आपदा के दौरान भी बनी थी। जब स्यानाचट्टी कस्बे का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आपदा के एक वर्ष बाद भी सरकारी तंत्र स्थायी समाधान निकालने में पूरी तरह विफल रहा है।
आपदा प्रभावित दिनेश राणा, शैलेन्द्र सिंह, जयपाल सिंह, चैन सिंह और बलदेव सिंह का कहना है कि आपदा राहत के नाम पर प्रभावितों के साथ केवल छलावा हुआ है। इधर, लगातार बारिश के चलते फूलचट्टी क्षेत्र और कुठार गांव के पास सड़क से बहकर आया मलबा, बड़े-बड़े पेड़ और अन्य अवशेष यमुना नदी के प्रवाह में बाधा बन रहे हैं।