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बैंक खुला नहीं और कर दी फैमिली पेंशन ट्रांसफर

Tue, 07 Feb 2017 02:04 PM IST
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
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पेंशन
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आर्मी से रिटायर्ड एक फौजी की फैमिली पेंशन कोषागार की ओर से जिस बैंक शाखा में ट्रांसफर की गई, वह शाखा उस वक्त अस्तित्व में ही नहीं थी। अब परिवार के लोग पेंशन लेने के लिए कभी बैंक तो कभी कोषागार के चक्कर काट रहे हैं। कोषागार अधिकारी खुद यह नहीं समझ पा रहे हैं कि जब बैंक शाखा अस्तित्व में थी ही नहीं तो भला उनके रिकार्ड में कैसे दर्ज हो गई।
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वर्ष 1989 में एक रिटायर फौजी की फैमिली पेंशन पिथौरागढ़ कोषागार से दून ट्रांसफर की गई। तब पूर्व फौजी कहीं दूसरी जगह नौकरी कर रहे थे। इस बीच सरकार की ओर से शासनादेश हुआ कि सेंटर और राज्य कर्मचारी एक साथ दोनों फैमिली पेंशन का लाभ नहीं ले सकते हैं। इस कारण फौजी ने सेना से मिलने वाली पेंशन के बारे में कोई जानकारी हासिल नहीं की।

वर्ष 2015 में फिर से शासनादेश हुआ कि एक साथ दो फैमिली पेंशन ली जा सकती हैं। इस पर फौजी के परिजनों ने सेना से मिलने वाली फैमिली पेंशन के बारे में पूछताछ की। वह कोषागार पहुंचे तो पता चला कि अब पेंशन बैंक से मिलती है। वर्ष 1989 का यह मामला है तब उनके पेंशन संबंधी कागज प्रेमनगर स्थित पीएनबी बैंक की शाखा में ट्रांसफर किए गए थे।
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अब जानकारी वहीं से मिलेगी। फौजी के परिजन पीएनबी की प्रेमनगर शाखा पहुंचे तो पता लगा कि जब कागज ट्रांसफर किए गए, उस समय यहां पर पीएनबी की ब्रांज थी ही नहीं। पीएनबी की प्रेमनगर ब्रांच वर्ष 1995 में अस्तित्व में आई।

इस पर परिजनों ने कोषागार में आरटीआई लगाई और पूछा कि जब वह ब्रांच अस्तित्व में थी ही नहीं तो आखिर किस शाखा में कागज ट्रांसफर किए गए। कोषागार अधिकारियों ने अपने स्तर से जांच कराई तो मामला सही निकला। इसके बाद पीएनबी की सभी ब्रांचों को पत्र भेजे गए, लेकिन सभी की ओर से एक ही जवाब मिलने पर पीएनबी मुख्यालय को पत्र भेजा गया है।

नहीं है ऐसा कोई अकाउंट
फौजी के परिजन पीएनबी की लगभग सभी ब्रांच में घूम चुके हैं, लेकिन सभी ने उनके पेंशन संबंधी अकाउंट या ऐसा कोई रिकार्ड होने से मना कर दिया। कहीं से भी फौजी की पेंशन और उसके कागज का रिकार्ड ट्रेस नहीं हो पा रहा है। 

रिकार्ड में यही दर्ज है कि फौजी और उसके अकाउंट संबंधी सभी डिटेल पीएनबी की प्रेमनगर शाखा को भेज दी गई थी। वर्ष 1989 का मामला होने की वजह से यह ट्रेस नहीं हो पा रहा है। हालांकि पीएनबी के हेडक्वार्टर को पत्र भेज दिया गया है। 
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- मो. गुलफाम अहमद, कोषाधिकारी
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