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Uttarakhand News: विश्व वन्यजीव दिवस...संरक्षण की कोशिशों का दिखा असर, वन्यजीवों की बढ़ी संख्या

Sat, 01 Mar 2025 02:45 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

आरटीआर के उप निदेशक गर्मी के समय वन्यजीवों के लि, जल उपलब्धता एक चुनौती रही है। वन्यजीव पानी पीने के लिए आबादी क्षेत्रों की तरफ ही चले जाते थे।अधिकाशं क्षेत्र भाबर क्षेत्र तथा पहाडी क्षेत्र में स्थित होने के कारण बोरिंग के माध्यम से जल उपलब्ध कराना भी सम्भव नहीं था।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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राज्य में वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों बीच वन्य जंतुओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। वन विभाग वन्य जंतुओं की सुरक्षा और संरक्षण के लिए कई कदम उठाए हैं, इसके अलावा वह नए प्रयास भी कर रहा है। इसमें वास स्थलों में सुधार के तहत अवनत वनों को पुराने स्वरूप में लाने की कोशिश के साथ ही स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के तहत वन कर्मियों की नियुक्ति कर तैनाती की जानी है ।

आरटीआर में डब्ल्यू- 3 मॉडल के दूसरी जगह ट्रायल की तैयारी

राजाजी टाइगर रिजर्व में जल प्रबंधन के लिए पांच साल पहले वेल, वाटर होल्स और वाइल्ड लाइफ मॉडल लागू किया गया। आरटीआर के उप निदेशक गर्मी के समय वन्यजीवों के लि, जल उपलब्धता एक चुनौती रही है। वन्यजीव पानी पीने के लिए आबादी क्षेत्रों की तरफ ही चले जाते थे।अधिकाशं क्षेत्र भाबर क्षेत्र तथा पहाडी क्षेत्र में स्थित होने के कारण बोरिंग के माध्यम से जल उपलब्ध कराना भी सम्भव नहीं था।

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पांच साल पहले राजाजी टाइगर रिजर्व के धौलखंड और चिल्लावाली रेंज में क्षेत्र क्षेत्रीय भौगोलिक तथा भूगर्भीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए चार रेंजों में नौ कुओं का निर्माण किया गया। इसमें ग्रेवीटी के माध्यम से 35 वाटर होलों (कृत्रिम जलाशय) को कुओं से जोड़ा गया। इससे जंगल के वास स्थल में सुधार हुआ। वॉटर होल के पास पक्षियों की संख्या बढ़ी है।

यहां पर हिरन से लेकर तेंदुओं की खासी संख्या हो गई है। यहां पर तेंदुओं को देखे जाने के मामले में नंबर वन पर पहुंच गया है। भविष्य में राजाजी टाइगर रिजर्व के मोतीचूर, रवासन, चीला रेंज में इसी मॉडल से वन्यजीवों के लिए पानी की व्यवस्था की जाएगी। वहीं, अधिकारियों के मुताबिक कार्बेट टाइगर रिजर्व में ऐसी शुरूआत करने की योजना है।

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जंगल में बनाए गए खास इको ब्रिज

वन्यजीव संरक्षण का संदेश देने और वन्य जंतुओं के लिए वन विभाग ने कुछ जगह पर इको ब्रिज बनाने का भी फैसला किया। इसमें रामनगर वन प्रभाग के अंतर्गत कालाढूंगी - नैनीताल मार्ग पर एक इको ब्रिज बनाया गया, इसी वन प्रभाग के तहत फतेहपुर रेंज में भी बनाया गया था। अब हल्द्वानी वन प्रभाग में भी यह कोशिश की गई है, इसमें हल्द्वानी टनकपुर रोड पर इको ब्रिज बनाया गया है। वन महकमे के अनुसार यह पुल वृक्षवासी बंदर, सरीसृप, गिलहरियों को सड़क दुघर्टना के जोखिम को कम करेगा। इसके अलावा लोगों और पर्यटकों के बीच वन्यजीव संरक्षण को लेकर जागरूकता भी बढ़ायेगा।

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वनों को बेहतर करने की कोशिश

वन विभाग हरियाली बढ़ाने के लिए पौधरोपण करता है इसके अलावा वन विभाग में अपने वनों की भी सेहत सुधारने का फैसला किया है। इसमें जिन वनों की स्थिति खराब हुई है वहां आठ साल की कार्य योजना बनाकर उन्हें फिर से पुराने स्वरूप में लाने का काम किया जाएगा। प्रमुख वन संरक्षक धनंजय मोहन कहते हैं कि वास स्थल सुधार समेत अन्य कार्य किए गए हैं।

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स्पेशल फोर्स के लिए भर्ती की तैयारी
डेढ़ दशक पहले कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा के लिए स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स बनाने की योजना बनी। इस काम में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी में भी मदद की बात की, लेकिन तकनीकी कारणों के चलते यह फोर्स तैयार नहीं हो सकी। अब वन विभाग नए सिरे से कोशिश कर रहा है इस साल भर्ती के लिए अधियाचन भेजा जा चुका है। अगर अन्य कोई तकनीकी समस्या नहीं आई तो संभावना है कि इस साल स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के लिए वन कर्मियों की भर्ती की प्रक्रिया पूरी हो जाए। इस फोर्स से कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में टाइगर की सुरक्षा और मजबूत हो सकेगी। इसके अलावा वन विभाग ने हाल के वर्षों में 2155 वन आरक्षियों, 325 वन दरोगा, 46 रेंजर और 45 एसडीओ पदों पर भी भर्ती कर जंगल की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कदम उठाया।

राज्य में टाइगर की संख्या 500 से अधिक

राज्य में टाइगर की संख्या में खासी बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2006 में राज्य में 178 टाइगर होने का आकलन किया गया था। यह संख्या वर्ष 2022 में बढ़कर 560 पर पहुंच गई। राज्य में हिम तेंदुओं की संख्या भी खासी है। भारतीय वन्यजीव संस्थान के अनुसार उत्तराखंड (124) हिम तेंदुए हैं। उत्तराखंड में हाथियों की संख्या बढ़ी है। राज्य में वर्ष 2001 में 1507 थी, इसमें लगातार बढ़ोतरी हुई। राज्य में वर्ष 2020 में हाथियों की संख्या 2026 पर पहुंच गई। भारतीय वन्यजीव संस्थान ने 2022 में तेंदुओं का आकलन किया गया था, यह संख्या 3115 थी। इसमें वर्ष-2022 तेंदुओं की संख्या में 33 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी हुई।

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