ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर लाइन काफी पुरानी और जर्जर स्थिति में हैं। इससे बार-बार लीकेज की समस्या आती है। लीकेज के कारण प्रतिदिन हजारों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है।
मानकों की बात करें तो पेयजल लाइनों में लीकेज अधिकतम पांच फीसदी ही होना चाहिए, लेकिन दून में इसका आंकड़ा 20 से 30 फीसदी से अधिक है। यह समस्या सालों से है, लेकिन जल संस्थान इसको लेकर गंभीरता से प्रयास नहीं कर रहा है। जल संस्थान के अनुसार रोजाना 60 एमएलडी (मिलियन लीटर डेली) से अधिक पानी लीकेज से ही बर्बाद हो जाता है।
दून में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था
- नगरीय व ग्रामीण पंपिंग और गुरुत्व योजनाएं- 190
- ट्यूबवेल- 292
- स्वचालित और मिनी ट्यूबवेल- 374
- ओवरहैंड टैंक, अंडरग्राउंड टैंक- 517
दून में पानी की मांग और उपलब्धता
दक्षिण जोन
मांग- 88 एमएलडी
उपलब्धता- 103 एमएलडी
उत्तर जोन
मांग- 55 एमएलडी
उपलब्धता- 60 एमएलडी
पित्थूवाल जोन
मांग- 32 एमएलडी
उपलब्धता- 26 एमएलडी
रायपुर जोन
मांग- 33 एमएलडी
उपलब्धता-36 एमएलडी
जनसंख्या का दबाब लगातार बढ़ता जा रहा है। हालांकि, जलसंस्थान की ओर से इस बीच कई नए ट्यूबवेल आदि का निर्माण किया गया, लेकिन इसके बाद भी मानकों के हिसाब से पानी नहीं मिल पाता है। कोशिश की जाती है कि लोगों को पर्याप्त पानी उपलब्ध हो पाए।
- निलिमा गर्ग, महाप्रबंधक, जलसंस्थान