बोलना भी नहीं सीख पा रहे छोटे बच्चे
कोरोनेशन अस्पताल के डिस्ट्रिक्ट इंटरवेंशन अर्ली इंटरवेंशन सेंटर की साइकोलॉजिस्ट डॉ. नीलम जोशी ने बताया कि मोबाइल फोन के अधिक इस्तेमाल की वजह से बच्चे छोटी उम्र में बोलना नहीं सीख पा रहे हैं। अपने आपको खुलकर एक्सपोज न कर पाना, खेल न पाने जैसी दिक्कतें आ रही हैं। बिहेवियरल डिसऑर्डर की समस्या छह साल तक के बच्चों में अधिक देखने को मिल रही है।
घर का वातावरण बेहतर बनाएं
घर का माहौल अच्छा रखें। बच्चा जो भी सीखता है घर से ही सीखाता है। अगर माता-पिता दोनों वर्किंग हैं तो एक लोग बच्चे के लिए समय निकालें। घर का माहौल ऐसा बनाएं, जिसमें मोबाइल का कम इस्तेमाल किया जाए। खाना खाते समय या कोई ऐसा समय हो जहां पर मोबाइल कोई भी इस्तेमाल न करे। जिन माता-पिता के बच्चे छोटे हैं, वो शुरुआत से ही उन्हें मोबाइल फोन से दूर रखें। बच्चों के साथ बातें करें। उनके साथ समय बिताएं। बच्चों के मन की बात सुनें और उन्हें समझाएं।
लक्षण
- कम बोलना
- हर समय रोते रहना
- जिद करना
- गुस्सा करना
- खुद को पीटना
- बातें सब सुनना, लेकिन किसी भी बात को न बोलना पाना
- अपने से बड़े माता-पिता को पीटना
- हाथ पैर पटकना