तीन से चार घंटे की होती है सर्जरी
किडनी प्रत्यारोपण से पहले मरीज और दाता दोनों की विस्तृत चिकित्सा जांच की जाती है। सर्जरी के दौरान दाता का गुर्दा निकालकर मरीज के शरीर के निचले पेट के हिस्से में लगाया जाता है। सामान्यतः पुराने गुर्दों को नहीं निकाला जाता। यह पूरी सर्जरी लगभग तीन से चार घंटे तक चल सकती है। सामान्यत: ऑपरेशन के एक सप्ताह के बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है।
शनिवार को छोड़ हर दिन होता है पंजीकरण
डॉ. शेरोन कंडारी ने बताया कि किडनी प्रत्यारोपण के लिए एम्स के गुर्दारोग विभाग में पंजीकरण किया जाता है। यह सुविधा शनिवार को छोड़ कर हर कार्य दिवस पर उपलब्ध है। एम्स के गुर्दारोग विभाग में प्रत्यारोपण की ओपीडी सप्ताह में तीन दिन सोमवार, मंगलवार और बृहस्पतिवार को होती है। पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज, जैसे पहचान प्रमाण, निवास प्रमाण, मेडिकल रिकॉर्ड और डोनर का विवरण, अस्पताल में जमा करना होगा। यदि जीवित दाता नहीं है, तो मृत दाता के लिए प्रतीक्षा सूची में शामिल होने हेतु सरकारी पोर्टल या अस्पताल के माध्यम से पंजीकरण कराएं।
22 लोगों में किडनी प्रत्यारोपण, 111 प्रतीक्षा में
एम्स को रीजनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन से आठ जनवरी 2021 को किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति मिली थी। अप्रैल 2023 में यहां पहली बार किडनी ट्रांसप्लांट की गई। डॉ. कंडारी ने बताया कि अब तक 22 मरीजों में किडनी का सफल प्रत्यारोपण किया जा चुका है। 111 मरीजों की किडनी ट्रांसप्लांट के लिए प्रक्रिया गतिमान है। इन सभी के पास अंगदाता हैं। वहीं 50 मरीज मृतदाता (कैडेवर) की प्रतीक्षा में हैं।
अंगदान के प्रति जागरूकता की कमी
भारत में अंगदान के प्रति जागरूकता की कमी होने के कारण जरूरतमंद मरीजों को अंगदाता नहीं मिल पाते हैं। स्थिति यह है कि मात्र 10 फीसदी जरूरतमंदों को ही किडनी उपलब्ध होती हैं। शेष 90 प्रतिशत लोग ट्रांसप्लांट से वंचित रह जाते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता, चिकित्सक आदि का मानना है कि अंगदान को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए, जिससे बच्चे बचपन से ही अंगदान के प्रति जागरूक हों। आंकड़ों के अनुसार स्पेन में मस्तिष्क मृत रोगियों से अंगदान की दर विश्व में सबसे अधिक है, जो प्रति दस लाख जनसंख्या पर 33 है। भारत में वर्तमान अंगदान दर प्रति दस लाख पर 0.05 है (लगभग 50 मृत शरीर दाता प्रति वर्ष)।