मकसद यमुना वैली को विश्व की पहली हर्बल आयुर्वेदिक वैली में परिवर्तित करना है। यह पहल मई 2024 में उत्तराखंड के बड़कोट से हुई थी।जिसमें वर्तमान में यमुना के दोनों ओर के 29 गांवों और तीन कृषि जलवायु क्षेत्रों की 1000 महिलाएं मिलकर 62 प्रकार के औषधीय पौधों की खेती कर रही हैं। राज्य की 27 घाटियों में भविष्य में इस मॉडल पर औषधीय पौधे तैयार किए जाएंगे। आयुर्वेद कांग्रेस में कई नामी कंपनियों ने यमुना वैली के इस समूह से जड़ी बूटियां लेने की प्रतिबद्धता जताई।