बचपन में नहीं हुआ इलाज तो बुढ़ापे में खतरा
बचपन में अगर अस्थमा का सही इलाज नहीं किया जाता है तो बुढ़ापे में क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) होने की संभावना बढ़ जाती है। इससे अस्थमा लंबा खिंच जाता है। अब अस्थमा का इलाज उपलब्ध है तो शुरुआत में ही इसका इलाज कर लेना चाहिए।
अस्पताल में इस तरह के बच्चे आ रहे हैं
दून अस्पताल की ओपीडी में रोजाना चार से छह बच्चे ऐसे आते हैं, जिनमें अस्थमा होने की संभावना होती है। इन बच्चों की हिस्ट्री पूछने पर पता चलता है कि इनमें जेनेटिक कारण होने के साथ ही ये बच्चे प्रीमौच्योर पैदा हुए होते हैं। इसके अलावा इन बच्चों को मां का दूध भी नहीं मिला होता है।
लक्षण
बिना जुकाम हुए बदलते मौसम में बच्चा खांसता रहे। रात को सोते समय या दिन में इधर-उधर खेल कूद करने पर भी छाती से सांय सांय की आवाज आती है तो बच्चे को अस्थमा होने की संभावना हो सकती है।
उपाय
अस्थमा होने पर डॉक्टर की सलाह पर ही इलाज करें। एलर्जी वाली चीजों धूल, धुआं, धूम्रपान के सेवन से बचाव करें। इसके अलावा इंहेलर का इस्तेमाल भी डॉक्टर की सलाह पर करें। इंहेलर जल्दी शुरू किया जाए तो बचाब बेहतर हो सकता है।