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विश्व एड्स दिवस 2018: जनजागरूकता अभियान चलाने के बाद भी सबसे अधिक एचआईवी मरीज देहरादून में 

Sat, 01 Dec 2018 12:19 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी
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लोग एड्स को लेकर नहीं हैं जागरूक
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एचआईवी को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाने के बाद भी मरीजों की संख्या में ज्यादा कमी नहीं आई है। अप्रैल 18 से अक्तूबर 18 तक के आंकड़े बताते हैं कि देहरादून में 210 सबसे अधिक एचआईवी पॉजिटिव मिले हैं। सात माह के भीतर प्रदेश के 13 जिलों में 503 एचआईवी पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं। 

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नाको ने इस बार ‘नो योर स्टेटस’ की थीम दी है। थीम के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जांच कराने को कहा गया है। जांच में अगर एचआईवी पॉजिटिव की पुष्टि होती है तो दवाओं के माध्यम से वायरस को दबाया जा सके और मरीज लंबा एवं बेहतर जीवन जी सके। वर्ष 2012-13 में 889, 13-14 में 865, 14-15 में 858, 15-16 में 822, 16-17 में 828, 17-18 में 958 मरीज 13 जिलों में सामने आए थे।

अपर निदेशक उत्तराखंड एड्स नियंत्रण सोसायटी डॉ. विनोद टोलिया ने बताया कि लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। मरीज अगर सामने आते हैं तो उन्हें दवाएं देकर वायरस का प्रभाव कम करने के साथ ही बेहतर जीवन देने का प्रयास किया जा रहा है। कहा कि अगर एचआईवी पॉजिटिव आता है तो उसकी जानकारी दें और तत्काल दवा देकर इलाज शुरू करें। 

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जिला   अप्रैल 2018 से अक्तूबर 2018 तक मरीज 

अल्मोड़ा      09
बागेश्वर      04 
चमोली       04
चंपावत       04
देहरादून       210 
पौड़ी गढ़वाल  15
हरिद्वार         91
नैनीताल       84 
पिथौरागढ़      10
रुद्रप्रयाग       07
टिहरी गढ़वाल  10
ऊधमसिंह नगर 49
उत्तरकाशी      06
योग ::       503

यूएसनगर में पांच माह में मिले 49 नए एड्स रोगी 

एड्स के खिलाफ चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों के बावजूद ऊधमसिंह नगर में पांच माह के भीतर 49 नए एचआईवी पॉजिटिव मरीजों का मिलना स्वास्थ्य विभाग के लिए खतरे की घंटी है। पिछले 15 वर्षों की बात करें तो इस जिले में 723 लोगों में एड्स पाया गया है। 

जिले में एचआईवी तेजी से पैर पसारता जा रहा है। वर्ष 2003 में दो और वर्ष 2004 में आठ लोग एचआईवी पॉजिटिव मिले थे। इसके बाद एड्स रोगियों की संख्या लगातार इजाफा होता जा रहा है। वर्ष 2013 में सर्वाधिक जिले में 92 लोगों में एड्स की पुष्टि हुई है। असुरक्षित यौन संबंध, नशे के बढ़ते प्रचलन, इंजेक्शन से नशा लेने के अलावा मेडिकल वेस्ट में फेंकी गई संक्रमित सुइयों के इस्तेमाल समेत अन्य वजहें एड्स को बढ़ावा दे रही हैं।

जानकार कहते हैं कि वर्ष 2003 में रुद्रपुर, सितारगंज में सिडकुल की स्थापना के बाद रोजगार के लिए देश के हर कोने से लोग यहां पहुंच रहे हैं। इससे मलिन बस्तियों में मिश्रित संस्कृति बढ़ रही है। अधिकांश लोग अशिक्षित और गरीब होने के कारण स्वास्थ्य पक्ष की तरफ अधिक ध्यान नहीं दे पाते हैं। स्वास्थ्य विभाग का फोकस भी इन्हीं मलिन बस्तियों में एड्स जागरूकता अभियान चलाने पर रहना चाहिए।        
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जिले में एड्स के रोगी  

वर्ष            एड्स रोगी        
2014          78       
2015          79       
2016          81       
2017          77       
2018         49 (सितंबर तक)       

एड्स प्रमुख रूप से एड्स पीड़ित गर्भवती महिला से शिशु को, असुरक्षित शारीरिक संबंध, खून व इस्तेमाल की हुई सुई से फैलता है। गर्भवती महिला को प्रसव पूर्व नियमित उपचार से शिशु को संक्रमित होने से बचाया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग इसके प्रयास कर रहा है। मलयेशिया में यह संभव हो चुका है। साथ ही मलिन बस्तियों में भी एड्स जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।        
- डॉ. हरेंद्र मलिक, जिला नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम
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