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कर्मकार कल्याण बोर्ड: करोड़ों के कथित घपले के स्पेशल ऑडिट से किनारा करने की तैयारी

Fri, 20 Nov 2020 09:33 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • दो सप्ताह बाद भी वित्त को नहीं भेजा गया प्रस्ताव
  • एजी के परफॉर्मेंस ऑडिट को बनाया जा रहा है आधार
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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उत्तराखंड भवन सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में करोड़ों रुपये के कथित घपले के स्पेशल आडिट से किनारा करने की तैयारी है। बोर्ड की ओर से दो सप्ताह के बाद भी स्पेशल ऑडिट का प्रस्ताव वित्त को नहीं भेजा गया है। सचिव श्रम हरबंस सिंह चुघ के मुताबिक उन्हें बोर्ड से स्पेशल ऑडिट को लेकर अभी पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।

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उधर, कर्मकार कल्याण बोर्ड को लेकर अंदरखाने सियासी खींचतान के भी अब संकेत मिल रहे हैं। हाल ही में शासन ने बोर्ड का पुनर्गठन किया था और श्रम मंत्री हरक सिंह रावत की जगह शमशेर सिंह सत्याल को अध्यक्ष बना दिया था।

इसके बाद सत्याल ने भी तेजी दिखाते हुए ऑनलाइन कार्यभार ग्रहण किया। इसके बाद कहा गया कि बोर्ड में बड़े पैमाने पर वित्तीय घपला हुआ है। इस घपले की जांच के लिए स्पेशल ऑडिट का एलान किया गया था।
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इस मामले को दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी बोर्ड की ओर से स्पेशल ऑडिट का प्रस्ताव तक वित्त विभाग को नहीं भेजा गया है। वित्त की ओर से इसकी पुष्टि की है कि उन्हें प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ। 

एजी के परफॉर्मेंस ऑडिट को बनाया जा रहा आधार
सूत्रों के मुताबिक एजी की ओर से हर साल होने वाली प्रदर्शन लेखा परीक्षा को वित्त के स्पेशल ऑडिट से बचने का आधार बनाया जा रहा है। एजी की ओर से इस परफॉर्मेंस ऑडिट के लिए बोर्ड से दस्तावेज मांगे गए हैं। सूत्रों के मुताबिक एजी ऑफिस अब तक तीन रिमाइंडर इस मामले में बोर्ड को भेज चुुका है।

पुराने बोर्ड ने एजी को दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए थे। लेकिन नये बोर्ड की ओर से एजी को सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बोर्ड की सचिव दीप्ति सिंह के मुताबिक एजी के ऑडिट की प्रक्रिया पहले से चली आ रही है। उनके द्वारा जो पत्रावलियां मांगी जा रही हैं, उन्हें उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं। 

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लोक लेखा परीक्षा को जाती है रिपोर्ट, लगेगा लंबा समय

एजी की परफार्मेंस रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाती है और इसके बाद लोक लेखा समिति इस पर विचार करती है। हाल यह है कि 2006 तक के मामले अभी तक लोक लेेखा समिति के पास लंबित हैं। एजी की रिपोर्ट में अनियमितताएं सामने आती भी हैं तो बोर्ड को लोक लेखा समिति की कार्रवाई पर निर्भर रहना होगा। 

हाईरिस्क ऑडिट की जल्द आ जाती रिपोर्ट
प्रदेश में ऑडिट के नियम भी बदल गए हैं। टीमों को हाई रिस्क और लॉ रिस्क के हिसाब से ऑडिट करना होता है। यह मामला वित्तीय घपले से संबंधित है, लिहाजा इसका हाई रिस्क ऑडिट होगा। मतलब यह भी कि ऑडिट टीम वित्तीय अनियमितताओं के आधार पर जांच करती। यह रिपोर्ट भी दो से तीन माह के अंदर सामने आ जाने की संभावना रहती।

बोर्ड की बैठक में स्पेशल ऑडिट कराने का निर्णय लिया गया था। एजी के ऑडिट के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। मैं पिथौरागढ़ में हूं। देहरादून आने पर इस बारे में कुछ कह सकूंगा।
- शमशेर सिंह सत्याल, अध्यक्ष, कर्मकार कल्याण बोर्ड
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