एजी की परफार्मेंस रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाती है और इसके बाद लोक लेखा समिति इस पर विचार करती है। हाल यह है कि 2006 तक के मामले अभी तक लोक लेेखा समिति के पास लंबित हैं। एजी की रिपोर्ट में अनियमितताएं सामने आती भी हैं तो बोर्ड को लोक लेखा समिति की कार्रवाई पर निर्भर रहना होगा।
हाईरिस्क ऑडिट की जल्द आ जाती रिपोर्ट
प्रदेश में ऑडिट के नियम भी बदल गए हैं। टीमों को हाई रिस्क और लॉ रिस्क के हिसाब से ऑडिट करना होता है। यह मामला वित्तीय घपले से संबंधित है, लिहाजा इसका हाई रिस्क ऑडिट होगा। मतलब यह भी कि ऑडिट टीम वित्तीय अनियमितताओं के आधार पर जांच करती। यह रिपोर्ट भी दो से तीन माह के अंदर सामने आ जाने की संभावना रहती।
बोर्ड की बैठक में स्पेशल ऑडिट कराने का निर्णय लिया गया था। एजी के ऑडिट के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। मैं पिथौरागढ़ में हूं। देहरादून आने पर इस बारे में कुछ कह सकूंगा।
- शमशेर सिंह सत्याल, अध्यक्ष, कर्मकार कल्याण बोर्ड