-ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने किया लाइटनिंग एक्शन का आह्वान
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रविवार को राजधानी में आयोजित फेडरल एग्जीक्यूटिव की बैठक में फेडरेशन ने 10 मार्च 2026 को देशव्यापी लाइटनिंग एक्शन और कार्य बहिष्कार का आह्वान किया है।
फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे और सेक्रेटरी जनरल पी रत्नाकर राव ने कहा कि सरकार बिना पर्याप्त लोकतांत्रिक परामर्श और हितधारकों की आपत्तियों को सुने इस बिल को संसद में पारित कराने की जल्दबाजी कर रही है। बैठक में आरोप लगाया गया कि नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 और यह संशोधन बिल बिजली क्षेत्र के निजीकरण को थोपने के उपकरण मात्र हैं। वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने और निजी हाथों में सौंपने की शर्तों को राज्यों की वित्तीय सहायता से जोड़ना संघीय ढांचे पर प्रहार है।
बैठक में उत्तराखंड सरकार की ओर ये यूजेवीएनएल की जल विद्युत परियोजनाओं की भूमि को निजी क्षेत्र को आवंटित करने के निर्णय का भी कड़ा विरोध किया गया। फेडरेशन ने चेतावनी दी कि इससे यमुना बेसिन की महत्वपूर्ण परियोजनाओं के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसके अतिरिक्त, पंजाब में बिजली क्षेत्र की भूमि बेचने और उत्तर प्रदेश में 466 दिनों से जारी निजीकरण विरोधी आंदोलन का भी समर्थन किया गया।
फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार संसद में बिल पेश करती है तो देशभर के बिजली अभियंता और कर्मचारी कार्य छोड़ कर सड़कों पर उतरेंगे। उनकी मुख्य मांगों में बिल की वापसी, निजीकरण पर रोक और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली शामिल है।