अमेरिका के हवाई द्वीप में अमेरिका और जापान के पेनक्रियाज रोग विशेषज्ञों के साथ वैद्य वालेंदु
अमेरिका और जापान के पेनक्रियाज रोग विशेषज्ञों के 50वें संयुक्त वार्षिक सम्मेलन में देहरादून के वैद्य बालेंदु प्रकाश ने अपने अनुसंधान से आयुर्वेद का लोहा मनवाया है। अमेरिका व जापान के विशेषज्ञों ने भी उनके अनुसंधान का संज्ञान लिया।
अमेरिका के हवाई द्वीप में आयोजित सम्मेलन में विशेषज्ञों के समूह ने पैंक्रियास के रोगियों में लगातार वृद्धि होने, उससे होने वाले घातक परिणामों व मृत्यु के आंकड़ों पर चर्चा की। आयुर्वेदिक चिकित्सक वैद्य बालेंदु प्रकाश ने आयुर्वेद के रस शास्त्र पर आधारित तांबा, पारा, गंधक, देवदाली, अपराजिता और नींबू के सहयोग से तीन वर्षों में तैयार की गई आयुर्वेदिक दवा के जरिये पेनक्रिएटाइटिस से ग्रसित 860 मरीजों पर अपने 23 वर्षों के अध्ययन को प्रस्तुत किया।
पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय की वरिष्ठ प्रोफेसर, नेशनल पैंक्रियाज फाउंडेशन के चैप्टर मैनेजर, हीरोसाकी विश्वविद्यालय जापान के डॉक्टर, नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के कैंसर रोग विशेषज्ञ आदि ने कहा कि यह शोध तथ्यों और संख्या को लेकर अद्वितीय है।
वैद्य बालेंदु ने कहा कि पेनक्रिएटाइटिस एक जटिल और जानलेवा रोग है। जिसके रोगियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अमूमन यह माना जाता है कि यह बीमारी शराब के अत्यधिक सेवन तथा अनुवांशिक कारणों से होती है। वैद्य बालेंदु के 860 मरीजों पर एकत्र आंकड़ों के अनुसार मात्र 30 प्रतिशत रोगियों में शराब सेवन और पांच प्रतिशत में अनुवांशिक लक्षण पाए गए। इसके बावजूद चिकित्सा अनुसंधान परिषदों द्वारा इस बीमारी से संबंधित कोई आंकड़ा एकत्र नहीं किया जा रहा है।
वैद्य बालेंदु ने कहा कि तांबे धातु पर आधारित इस औषधि से पेनक्रिएटाइटिस रोग की सफल चिकित्सा को देखते हुए इस पद्धति में अनुसंधान की बहुत आवश्यकता है। बालेंदु के कार्य को पैंक्रियास नामक मेडिकल जर्नल के नए अंक में शोध प्रपत्र सार के रूप में स्थान मिला है। अगले चरण में उनका मिशन नोबेल प्राइजेज के तहत जयपुर के पेट रोग विशेषज्ञ के साथ पेनक्रिएटाइटिस के रोगियों पर एक नियंत्रित चिकित्सकीय अध्ययन शीघ्र ही शुरू करना प्रस्तावित है।