राजभवन में बुधवार को महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण के मुखर स्वर गूंजे। राज्यपाल बेबीरानी मौर्य की पहल पर विभिन्न विभागों की करीब 200 महिला अफसरों ने अपने दिल की बात की। महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण के लिए अहम सुझाव भी दिए। इस दौरान महिला सुरक्षा और कल्याण से संबंधित तमाम कार्यक्रमों और योजनाओं का असल लाभ लेने के लिए उन्हें दूरस्थ क्षेत्र तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। महिला पुलिस अफसर हों या शिक्षिका या फिर नर्स, बेबाकी से सबने अपनी बात रखी। यह बेबाकी राज्यपाल को भी पसंद आई और उन्होंने अपने संबोधन में इसकी खुलकर तारीफ की। राज्यपाल ने जल्द ही दोबारा इस तरह के कार्यक्रम के आयोजन का इरादा भी जाहिर किया। साथ ही कहा कि कार्यशाला में आए फीडबैक के आधार पर सरकार को संस्तुति भेजी जाएगी।
उच्च पदों पर आसीन सफल महिलाएं समाज की अन्य महिलाओं के लिए रोल मॉडल है। प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से उनके सशक्तीकरण में अपना योगदान दे रही हैं। महिलाओं की मजबूती में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। महिलाओं के स्वास्थ्य सुधार पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। महिला व बाल विकास की सभी योजनाओं की जानकारी दूरस्थ क्षेत्रों में भी प्रत्येक महिला को होनी चाहिए। शिक्षण संस्थानों में बच्चियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि उनकी पढ़ाई को हतोत्साहित न किया जा सके। स्कूलों में भी महिला सुरक्षा और अधिकारों से संबंधित कार्यशालाओं का आयोजन किया जाए। महिला सुरक्षा व सशक्तीकरण से संबंधित जागरूकता शिविरों को आयोजन सभी जगह किया जाए। कन्या भ्रूण हत्या को समाप्त करने हेतु जन अभियान चलाया जाए।
-बेबी रानी मौर्य, राज्यपाल, उत्तराखंड
जब मैं यूपी में कार्यरत थी, तब एक बार दाइयों के प्रशिक्षण का कार्यक्रम रखा। इस दौरान मुझे एक जानकारी ने स्तब्ध कर दिया। दाइयों ने हमें बताया कि जब किसी बच्चे का जन्म होता है, तब हम बेटे को गरम पानी से नहलाते हैं और बेटी हुई, तो उसे ठंडे पानी से नहलाते हैं। यह कई वर्ष पूर्व की बात है, लेकिन समझा जा सकता है कि समाज में बेटा बेटी को लेकर कितनी असमानता है। यह असमानता भाई बहन से लेकर अन्य स्तरों पर भी है। इसे दूर किया जाना जरूरी है।
-राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव
विश्वभर में जिन देशों में महिलाएं सशक्त है वह देश विकसित देशों की श्रेणी में आते हैं। महिला सशक्तीकरण हेतु सभी को कार्य करना होगा। महिला सुरक्षा व सशक्तीकरण की कार्यशाला आयोजित करवाना संवेदनशील व प्रासंगिक पहल है।
-आरके सुधांशु, सचिव राज्यपाल
उत्तराखंड राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति महिलाओं हेतु देशभर की तुलना में बेहतर स्थिति में है। उत्तराखंड में महिलाओं से संबंधित अपराध 0.05 प्रतिशत है। महिलाओं से संबंधित अपराधों के निस्तारण में उत्तराखंड का स्थान देशभर में सातवां है। देशभर में महिला उत्पीड़न के मामलों में उत्तराखंड का स्थान 21वां है। पुलिस बलों में महिलाओं की संख्या राज्य में पांच प्रतिशत से लगभग 11 प्रतिशत तक बढ़ गई है। यह उत्तर भारतीय राज्यों में सर्वाधिक है।
-रिदिम अग्रवाल, डीआईजी पुलिस
वन विभाग में भी महिलाओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है। महिलाओं सभी पदों पर अच्छा कार्य कर रही है।
-रंजना काला, प्रमुख वन संरक्षक, उत्तराखंड
पुलिस विभाग के स्तर पर महिला यौन अपराधों के संबंध में डेडिकेटेड ऑन लाइन एफआईआर की व्यवस्था की जाए।
-
कहकशां खान, विधि सलाहकार, राज्यपाल
अब महिला चीता स्कूल खुलने के दौरान भी रहेगी मौजूद
कार्यशाला में कई महिला अफसरों ने स्कूल कॉलेजों के खुलने और बंद होने के समय लड़कियों से छेड़छाड़ के मामले उठाए। उन्होंने कहा कि कई परिवारों को इस कारण अपनी बच्चियों को स्कूल न भेजने तक का निर्णय लेना पड़ता है। एक अधिकारी ने तो पुलिस के रवैये की खुलकर निंदा की। इस पर राज्यपाल ने गंभीरता दिखाने की नसीहत पुलिस को दी। सफाई देने देहरादून की एसपी सिटी श्वेता चौबे सामने आईं। उन्होंने कहा कि स्कूल कॉलेज बंद होते वक्त तो महिला चीता पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है। मगर अब सुबह भी स्कूल कॉलेजों के सामने उनकी तैनाती की जाएगी।