साल गांव से 70 किमी पाटी, पाटी से 31 किमी लोहाघाट, लोहाघाट से 13 किमी चंपावत और फिर चंपावत से 75 किमी पिथौरागढ़ की दौड़ लगानी पड़ी। इस पूरी कवायद में 12 घंटे से अधिक का वक्त लगा। परिजनों ने बताया कि प्रसूता भावना का गर्भ से लेकर शिशु जन्म तक एक बार भी न तो अल्ट्रासाउंड परीक्षण हुआ और न ही किसी तरह का सुरक्षा टीका लगा।
चंपावत जिला अस्पताल में गायनोकोलोजिस्ट नहीं होने से गर्भवती महिलाओं के जटिल केस यहां से रेफर करने पड़ रहे हैं। लोहाघाट अस्पताल को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे केस चंपावत जिला अस्पताल के बजाय सीधे पिथौरागढ़ महिला अस्पताल रेफर करें। वहीं चंपावत अस्पताल में हुई जांच में पता चला कि गर्भ धारण करने के बाद महिला का एक भी परीक्षण नहीं हुआ है। इसके लिए संबंधित क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता से जवाब मांगा जाएगा।
-डॉ. आरके जोशी, मुख्य चिकित्साधीक्षक, जिला अस्पताल चंपावत