लेबर रूम में ले जाने की बजाय वह इधर-उधर घुमाते रहे। मनीषा को अल्ट्रासाउंड कराने को बोला गया। वह अल्ट्रासाउंड के लिए आधे घंटे तक इंतजार में खड़ी रही। अचानक तेज दर्द होने लगा तो वह लेबर रूम वापस आ गई।
आरोप है कि डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लौटा दिया। वह लेबर रूम से बाहर निकली ही थी कि गैलरी में ही प्रसव हो गया। आनन-फानन में गर्भवती को उसके पति और वहां मौजूद लोग उठाकर लेबर रूम ले गए, जहां गर्भवती महिला का आगे का इलाज किया गया। महिला के पति का यह भी आरोप है कि स्टाफ ने उनकी पत्नी से व्हीलचेयर भी छीन ली।
दून महिला अस्पताल में लापरवाही का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले 20 सितंबर को अस्पताल में पांच दिन तक फर्श पर पड़ी रहने के बाद महिला को प्रसव हुआ था।
उसके बाद फर्श पर ही जच्चा-बच्चा ने दम तोड़ दिया था। इस मामले की जांच की गई थी, लेकिन बाद में चिकित्सकों को क्लीन चिट दे दी गई थी।
मुझे मामले के जानकारी नहीं है। मैं ओटी में एक जटिल ऑपरेशन में व्यस्त थी। जानकारी मिलने पर बताती हूं।
-डॉ. मीनाक्षी जोशी, सीएमएस, दून महिला अस्पताल