बच्चे की मौत के बाद हंगामा करते परिजन
यहां फिर जच्चा बच्चा का सही से उपचार नहीं किया गया और तीन घंटे बाद उसे बच्चे की हालत बिगड़ने की बात बताई और बच्चे को सुशीला तिवारी या निजी अस्पताल ले जाने को कहा। भुवन तुरंत बच्चे को लेकर सुशील तिवारी अस्पताल पहुंचा, जहां इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। बच्चे की मौत की खबर से महिला अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। इधर, बच्चे की मौत से गुस्साए परिजनों ने देर रात महिला अस्पताल में हंगामा किया।
जब डॉक्टर ने चेक किया था तब महिला सामान्य थी, हेमा की प्रीमेच्योर डिलीवरी हुई। ऐसे में बच्चे की देखरेख के लिए हायर सेंटर जरूरी होता है। माता-पिता को समय से बता दिया गया था, लेकिन वे ढाई-तीन घंटे तक महिला अस्पताल में ही घूमते रहे, एसटीएच नहीं ले गए। हेमा अस्पताल में भर्ती है और डॉक्टर उसका इलाज कर रहे हैं ।
- डॉ. भागीरथी जोशी, सीएमएस महिला अस्पताल
तीन नवंबर को होनी थी डिलीवरी
हेमा की तीन नवंबर को डिलीवरी होनी थी। इस तारीख को आधार मानकर डॉक्टर प्रीमेच्योर डिलीवरी बताकर पल्ला झाड़ ले रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने हेमा का सही से चेकअप नहीं किया वरना ये हादसा नहीं होता।