प्रसूता को तुरंत लेबर रूम में पहुंचाया गया। जबकि नवजात की स्थिति ठीक नहीं होने पर उसे नियोनेटल केयर यूनिट में भर्ती कराया गया। दोपहर साढ़े 12 बजे इलाज के दौरान नवजात ने दम तोड़ दिया।
इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन का कहना है महिला को सात माह का गर्भ था। जिसकी वजह से नवजात शारीरिक तौर पर पूरी तरह स्वस्थ नहीं था। डॉक्टरों ने बताया कि प्रसूता की देखभाल और इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई।
महिला सात माह से गर्भवती थी। उसे अस्पताल के एएनसी वार्ड में भर्ती कराया गया था। सुबह वह पति के साथ टॉयलेट गई थी और वहीं उसे प्रसव हो गया। जहां तक नवजात की मौत का सवाल है तो उसे बचाने का पूरा प्रयास किया गया, लेकिन ‘काग्नीजेनिटल एबनार्मिलिटीज’ की वजह से उसकी मौत हो गई। इसकी जांच कराई जा रही है। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. चित्रा जोशी, विभागाध्यक्ष, स्त्री रोग विभाग, दून मेडिकल कालेज
प्रसूता को टॉयलेट में प्रसव होने की बात सामने आई है। विभागाध्यक्ष से रिपोर्ट मांगी गई है। प्रथम दृष्टया जांच में यह बात सामने आई है कि महिला सात माह की गर्भवती थी और उसे अपने आप प्रसव हो गया। नवजात की मौत ‘काग्नीजेनिटल एबनार्मिलिटीज’ की वजह से हुई है। फिर भी सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।
...डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता, प्राचार्य, दून मेडिकल कालेज