नमामि गंगे प्रोजेक्ट की डीपीआर बनने में अभी महीनों लगेंगे, लेकिन यमुनोत्री और गंगोत्री क्षेत्र की महिलाओं ने अपने स्तर से गंगा और यमुना दोनों की सफाई का अभियान छेड़ दिया है।
यह भी तय किया है कि जिस कंपनी के पाउच, रैपर अधिक मिलेंगे उनसे नदियों की सफाई के लिए फंड मांगा जाएगा। इसके लिए कंपनियों को पत्र भेजे जा रहे हैं। मां गंगा-यमुना स्वच्छता मंच के बैनर तले यमुनोत्री की सफाई के बाद अब गंगोत्री की तैयारी है। इस अभियान से एवरेस्ट पर पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बछेंद्री पाल को भी जोड़ा गया है।
महिलाओं द्वारा 11 अक्तूबर को मां गंगा-यमुना स्वच्छता मंच बनाकर यमुनोत्री से अभियान शुरू किया गया। मुख्य अभियान गंगोत्री में 9 और 10 नवंबर को चलेगा। गंगोत्री धाम के कपाट 13 नवंबर को बंद होने हैं। इसके पहले सफाई होगी। अभियान की कमान क्षेत्रीय महिलाओं के हाथ में रहेगी।
स्कूली बच्चों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। गंगा के साथ गाड़-गदेरों की भी सफाई की जाएगी। प्रयोग के तौर पर यमुनोत्री के अभियान में 20 कुंतल पॉलीथिन निकली है। इसमें खैनी, फास्ट फूड के पाउच, पानी की बोतलें आदि पाई गईं।
नि:शक्तों संग सैकड़ों ने की गंगा की सफाई
गंगा सफाई के लिए रविवार को हजारों स्वयंसेवी गंगा में उतरे। हरकी पैड़ी से लेकर ज्वालापुर तक स्वयंसेवियों ने सुबह से शाम तक पसीना बहाया। शांतिकुंज के हजारों पीत वस्त्रधारियों ने मां गंगा में उतरकर श्रमदान किया।
सामान्य जनों के साथ ही देश के कई राज्यों से आए मूक-बधिरों ने भी गंगा की सफाई की। कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग रुड़की के छात्र-छात्राओं के साथ ही अन्य कई स्कूल-कॉलेजों के छात्र सफाई अभियान में जुटे।