विधायक पर आरोप लगाने वाली महिला ने अब कोर्ट की शरण ली है। उसने मुकदमा दर्ज कराने और डीएनए टेस्ट के लिए कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया है। महिला ने पुलिस जांच पर भी सवाल उठाए और आम व खास में भेद करने का आरोप लगाया। महिला नहीं यह सब जानकारी रविवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर दी।
महिला ने वीडियो के माध्यम से बताया कि उसे पुलिस से कोई आशा नहीं रह गई है, लिहाजा अब वह कोर्ट की शरण ले रही है। महिला के अनुसार कोर्ट ने दो सितंबर को सुनवाई की तिथि नियत की है। उसने पुलिस पर भी आरोप लगाया कि सिस्टम के दबाव में काम हो रहा है। यही फर्क है कि आम और खास में अंतर किया जा रहा है।
हालांकि पुलिस कप्तान इस मामले में पहले ही कह चुके हैं कि वह किसी प्रकार की कोताही जांच में बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने थाना नेहरू कॉलोनी से पुलिस जांच को हटाकर सीओ सदर को नामित किया था। उनके साथ में एक महिला अधिकारी को भी लगाया गया था। इस मामले में हर पहलू अपर जांच की जा रही है।
वकील के बयान दर्ज
इस मामले में जांच अधिकारी सीओ मनोज कुमार ने रविवार को वकील के बयान दर्ज किए। यह वही वकील हैं जिन्होंने डीएनए जांच पर सवाल उठाते हुए बाल आयोग को पत्र दिया था। महिला का कहना था कि उसने अपने पति और बच्चे का डीएनए टेस्ट कराया है। इस बात को वकील ने गलत ठहराया था।
महिला ने बच्ची की जान को बताया खतरा
महिला ने अपनी बच्ची की जान को खतरा बताया है। इस बाबत उसने महिला आयोग को पत्र लिखा है। यह पत्र भी महिला ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। इसका आरोप भी महिला ने विधायक पर ही लगाया है।