अन्य महिलाओं के साथ गर्भवती महिला
गांव में स्वास्थ्य विभाग द्वारा मुहैया कराई गई पालकी तो थी, पर गांव का पैदल रास्ता इस हाल में नहीं था कि गर्भवती महिला को पालकी पर सड़क तक लाया जा सके। ऐसे में इस महिला को प्रसव पीड़ा से कराहते हुए छह किमी की दुर्गम दूरी पैदल ही तय करनी पड़ी।
हालांकि इसके बाद सड़क पर 108 आपात एंबुलेंस के पहुंचने पर उसे नौगांव अस्पताल लाया गया, जहां सुरक्षित प्रसव होने पर परिजनों ने राहत की सांस ली। जिले में अब भी करीब डेढ़ सौ से अधिक गर्भवती महिलाएं दूरस्थ गांवों में कैद हैं। ऐसे में उनकी और गर्भ में पल रहे अजन्मे शिशुओं की जान पर मंडरा रहा खतरा टला नहीं है।
रस्टाड़ी कंडाऊ गांव से पहुंची महिला का अस्पताल में सुरक्षित प्रसव कराया गया। मां और बेटी दोनों स्वस्थ हैं। दूरस्थ गांवों से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए पालकी मुहैया करायी गई हैं। रास्तों की बदहाली के चलते इसमें दिक्कतें आ रही हैं।
-डा. निधि रावत, चिकित्सा अधीक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, नौगांव