लैंसडौन के पालकोट जदला में आठ साल पहले एक सड़क हादसे में हुई पति की मौत के बाद से उसकी विधवा मुआवजे के लिए चक्कर काटकर थक चुकी है।
महिला के सामने उसके दो बच्चों के लालन-पालन की समस्या बनी हुई है, लेकिन सरकारी मशीनरी को इस परिवार की दिक्कतें नजर नहीं आ रही है। पीड़िता ने एक बार फिर शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकृष्ट कराया है।
कोटद्वार के सिताबपुर सुखरौ निवासी अर्चना दुतपुड़ी पत्नी स्व. सुशील कुमार दुतपड़ी ने बताया कि उसके पति टैक्सी चालक थे। 11 अक्तूबर, 2008 को लैंसडौन से कोटद्वार आते वक्त पालकोट जदला के निकट उनका वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जिसमें उनके पति सुशील कुमार की मौत हो गई और चार अन्य लोग घायल हुए थे।
पति की मौत के कुछ दिन बाद मायके पक्ष की मदद से उसी साल दिसंबर माह तक कागजात तैयार कर शासन-प्रशासन को उपलब्ध करा दिए गए थे, लेकिन आठ साल बाद भी ट्रांसपोर्ट विभाग की ओर से मिलने वाला मुआवजा नहीं मिला है। पीड़िता ने बताया कि उसके दो नादान बच्चे हैं, ऐसे में उनका लालन-पालन करना मुश्किल हो रहा है।
ऐसी हालत में यदि मुआवजा और आर्थिक सहायता मिल जाती तो उसे बड़ा सहारा मिलता। पीड़ित महिला ने बताया कि उसकी ओर से जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी लैंसडौन के यहां मृत्यु प्रमाणपत्र, पोस्टमार्टम, पंचनामा रिपोर्ट समेत सभी औपचारिकताएं पूरी कर जमा करवाई गई हैं। जिलाधिकारी सुशील कुमार ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। इसे दिखवा लिया जाएगा।