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पढ़िए, बौद्ध धर्म में महिलाओं यह कैसा हो गया हाल?

Thu, 27 Aug 2015 12:21 AM IST
ओमप्रकाश तिवारी/अमर उजाला, देहरादून
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धर्म आधारित जनगणना के ताजा आंकड़े समाज में महिलाओं के प्रति पुरुषों के नजरिये को भी परिभाषित कर रहे हैं। जनसंख्या के लिहाज से हिंदू और मुसलमान भले ही ईसाइयों से अधिक हैं, लेकिन लिंगानुपात में वह ईसाइयों से काफी पीछे हैं। इस मामले में सबसे खराब हालत बौद्ध धर्म की है। यहां पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या लगभग आधी ही है।
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साल 2011 की जनगणना के अनुसार दून जिले में हिंदुओं में एक हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 908 है, जबकि मुसलमानों में यह औसत 880 है। ईसाई धर्म में महिलाओं की संख्या प्रति हजार पुरुषों पर 1015 है।

आंकडे़ बताते हैं कि ईसाइयों में ने केवल औसत बेहतर है, बल्कि यहां महिलाओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले अधिक है। जबकि सिखों में प्रति हजार पुरुषों पर 910 महिलाएं हैं। जबकि बौद्ध धर्म में एक हजार पुरुषों पर केवल 509 महिलाएं हैं। जैन धर्म में प्रति हजार पुरुषों पर 952 महिलाएं हैं।
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शहर की अपेक्षा देहात में महिलाएं बेहतर

पढ़ा लिखा माना जाने वाले शहरी क्षेत्र में महिलाओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले काफी कम है। जबकि देहात क्षेत्र में यह औसत बेहतर दिखाई देता है। शहरी क्षेत्र में हिंदुओं में प्रति हजार पुरुषों पर 891 महिलाएं हैं जबकि देहात में महिलाओं की संख्या 924 हो जाती है।

इसी तरह मुसलमानों में शहरी क्षेत्र में प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 857 है जबकि देहात में 904 है।

ईसाइयों में शहरी क्षेत्र में प्रति हजार पुरुषों पर 1028 महिलाएं हैं जबकि देहात में 988 हैं। देहात क्षेत्र में ईसाइयों में महिलाओं के औसत में कमी देखी जा सकती है। सिख धर्म में शहरी क्षेत्र में प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 910 है जबकि देहात में यह औसत 904 का हो जाता है।

बौद्ध धर्म में शहरी क्षेत्र में जहां एक हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 509 है वहीं देहात में यह संख्या 780 हो जाती है। जैन धर्म में शहर में महिलाओं का औसत 952 का है जबकि देहात में इनका औसत 1113 का हो जाता है। लगभग सभी धर्मों में देहात में महिलाओं की स्थिति बेहतर दिखाई देती है।
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