शायद ही आपने कोई महिला को राजमिस्त्री के रूप में काम करते देखा होगा। शारीरिक श्रम के हिसाब से यह काम केवल पुरुषों के लिए ही माना जाता है, लेकिन नौ वर्ष पहले रामपुर से हल्द्वानी आकर पार्वती ने दूसरों की कई इमारतें खड़ी कर दी।
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हालांकि वह अब तक अपना मकान नहीं बना सकी हैं। यूं तो देश भर में शनिवार को महिला दिवस पर महिला सशक्तिकरण की चर्चाएं होंगी, मगर ऐसी गतिविधियों से अंजान यह महिला अब भी दबंग ठेकेदारों से जूझ रही हैं।
बंगाल की रहने वाली
पार्वती देवी (41) मूलरूप से बंगाल की रहने वाली हैं और उनका असली नाम उज्जन देवी है। पार्वती की ससुराल मिलक (रामपुर) है।
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वह वर्षों पहले पति भूपराम मौर्या के साथ हल्द्वानी आई थीं। परिवार पालने के लिए पति के साथ मजदूरी की और 2007 में उन्होंने किन्नी पकड़ ली। आज वे यहां की जानीमानी राजमिस्त्री हैं।
बना चुकी हैं 50 भवन
पति मजदूर हैं, फिर भी वह अपनी हुनर की बदौलत न केवल परिवार को पाल रही हैं, बल्कि तीन बच्चों को पढ़ा भी रही हैं। हल्द्वानी और आसपास के इलाकों में वह अभी तक लगभग 50 मकान बना चुकी हैं।
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वे एक दिन में वह लगभग आठ सौ से लेकर एक हजार ईंटों की चिनाई कर देती हैं। पार्वती कहती हैं कि वे भवन निर्माण का सारा काम बखूबी कर लेती हैं। दूसरों के मकान बना कर ही उन्होंने अपनी बेटी का घर बसाया है। दूसरी बेटी कक्षा 10 में, दो लड़के क्रमश: 11 एवं 9 में पढ़ते हैं।