फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शौचालय बने नहीं और गांव को मिल गया ग्रामश्री पुरस्कार

Mon, 20 Feb 2017 08:31 PM IST
राजेश पंगरिया / अमर उजाला, झूलाघाट (पिथौरागढ़)
विज्ञापन
toilet
विज्ञापन
नेपाल सीमा से सटे मूनाकोट विकासखंड के टाकुला गांव के लोग आज भी खुले में शौच करते हैं। आश्यर्च यह है कि इस गांव को कागजों में संपूर्ण शौचालय युक्त गांव गांव घोषित कर दो लाख रुपए का ग्रामश्री पुरस्कार भी मिल चुका है।
विज्ञापन


गांव के लोग पुरस्कार मिलने के बाद भी शौचालय बनाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। गांव में शौचालय बनाने के लिए दो साल से गड्ढे जरूर खोदे गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर किस आधार पर गांव को ग्रामश्री पुरस्कार दे दिया गया। अलबत्ता, इनाम में मिली राशि को विकास कार्यों में खर्च करने की तैयारी जरूर है।

नेपाल सीमा पर स्थित टाकुला गांव पिथौरागढ़ विधानसभा क्षेत्र में आता है। सड़क की सुविधा से वंचित इस गांव तक पहुंचने के लिए पांच किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। गांव में 12 परिवार रहते हैं। इनमें से सिर्फ एक भूतपूर्व सैनिक ने शौचालय का निर्माण करवाया है। शेष 11 परिवार के लोग आज भी खुले में शौच करते हैं, जबकि सरकार ने इस गांव को खुले में शौच की प्रथा से मुक्त गांव घोषित कर दिया है।
विज्ञापन


इसके लिए बाकायदा ग्राम पंचायत को 2 लाख रुपए की राशि और ग्रामश्री पुरस्कार का प्रशस्तिपत्र भी मिला है। गांव में 2 वर्ष पूर्व बने 11 गड्ढों में शौचालय बनने का आज भी गांव के लोग इंतजार कर रहे हैं। शौचालय को बनाने के लिए मिलने वाली 12 हजार रुपए की धनराशि के लिए खोले गए खाते बंद होने की कगार पर हैं। साथ ही इस गांव से सटे पीपलतड़ा और तड़ीगांव में भी कई घरों में शौचालय नहीं हैं।

टाकुला ग्रामसभा के अंतर्गत तड़ीगांव, जायल, बोनकोट, ज्ञानपिपली तथा टाकुला सहित 10 तोक आते हैं। ग्रामपंचायत को केंद्र सरकार द्वारा ओडीएफ (संपूर्ण शौचालय युक्त गांव) घोषित करते हुए 2 लाख रुपए का ग्रामश्री  पुरस्कार मिला है। पुरस्कार की धनराशि ग्राम पंचायत को मिल चुकी है। गांव की खुली बैठक में इस धनराशि को सर्वसम्मति से गांव के विकास में खर्च करने का प्रस्ताव पास किया गया है। ग्रामश्री पुरस्कार दिसंबर 2016 में मिला था। - सिम्मी देवी, ग्राम प्रधान टाकुला

इस मामले की जानकारी जुटाई जाएगी
झूलाघाट। स्वजल परियोजना के प्रबंधक दीप चंद्र पुनेठा ने बताया कि ग्रामश्री पुरस्कार की घोषणा प्रदेश के पंचायती राज विभाग द्वारा की जाती है। खुले में शौच से मुक्त गांव को 2012 के सर्वे के हिसाब से घोषित किया जाता है। शौचालय न होने के बाजजूद टाकुला गांव को ग्रामश्री पुरस्कार कैसे मिल गया, इसकी जानकारी मूनाकोट विकासखंड कार्यालय से जुटाई जा रही है।

स्कूल के शौचालय का उपयोग नहीं
टाकुला गांव के बच्चे राजकीय हाईस्कूल बौनकोट में पढ़ने जाते हैं। विद्यालय में शौचालय तो बना है लेकिन पानी न होने के कारण स्कूल के बच्चे, शिक्षक तथा अन्य कर्मचारी खुले में शौच करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें