नया शिक्षण सत्र शुरू होने के बाद भी शिक्षा विभाग दुर्गम में स्थित चकराता प्रखंड के बंद पड़े 16 जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षकों की तैनाती नहीं कर सका हैं। इसके चलते छात्रों को पढ़ाई के लिए 10-12 किमी की दूरी नपानी पड़ती है। अधिक दूरी होने के चलते कई अभिभावक अपने बच्चों को पांचवीं के बाद ही पढ़ाई छुड़वा देते हैं। बीते पांच साल से यह स्थिति जस की तस बनी हुई है।
चकराता विकासखंड में कुल 47 जूनियर हाईस्कूल हैं। इसमें से 16 स्कूलों में शिक्षकों के न होने से ताला लटका हुुआ है। इन स्कूलों से संबद्ध 350 छात्रों को पढ़ाई के लिए दूर-दराज के इलाकों में जाना पड़ता हैं। इसके साथ ही क्षेत्र में 11 जूनियर हाईस्कूल ऐसे हैं जो महज एकल शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। मात्र 20 जूनियर हाईस्कूलों में ही पर्याप्त मात्रा में शिक्षक हैं।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य रमेश सिंह ने बताया कि उनके गांव बगूर में स्थित जूनियर हाईस्कूल में ताला लटका हुआ है। मजबूरी में 10 छात्रों को पढ़ाई के लिए नौ किमी दूर डेरनाड़ जाना पड़ता है। छात्रों का अधिकांश समय आने-जाने में ही बीतता है। सर्दियों में छुट्टी होने के बाद अंधेरा होने पर ही छात्र घर पहुंच पाते हैं। खादरा निवासी रतन सिंह ने बताया कि गांव के बच्चों को पढ़ाई के लिए 13 किमी दूर भटाड़ जाना पड़ता है। रास्ता जंगल और खड्ड से होकर गुजरता है। ऐसे में हमेशा बच्चों की चिंता लगी रहती है।
ये स्कूल पड़े हैं बंद
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जूनियर हाईस्कूल शिरवा, डिमिच, म्यूंडा, निमगा, भगूर, बृनाड़, शेडिय़ा, डांगूठा, कांडा, खारसी, बनियाना, भूट समेत 16 स्कूल शिक्षकों के अभाव में बंद पड़े हैं।
यहां एकल शिक्षक के भरोसे पठन-पाठन
जूनियर हाईस्कूल हनोल, कांडी, नाडा, खबऊ, पुनाह-पोखरी, बंगाड़, लोहारी, मटियाना, समरखेड़ा, रावना, बिसऊ, खाटुवा, हाजा समेत 11 स्कूलों में पठन-पाठन एकल शिक्षक के भरोसे चल रहा है।
जिला शिक्षाधिकारी (बेसिक) हेमलता भट्ट ने बताया कि बंद पड़े जूनियर हाईस्कूलों में पदोन्नत शिक्षकों को भेजा जाता है। लेकिन वह ज्वाइनिंग नहीं देते। इसके चलते विभाग के सामने भी दिक्कतें आती है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत जिन प्राथमिक विद्यालयों में अधिक शिक्षक हैं। उन्हें बंद पड़े विद्यालयों में भेजा जाएगा।