हाईकोर्ट में गुरुवार को महिला प्रौद्योगिकी संस्थान में की जा रही नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई ह़ुई। सुनवाई के बाद कुलाधिपति, केंद्र सरकार, राज्य सरकार, एआईसीटीई, यूजीसी और तकनीकी विवि एवं महिला प्रौद्योगिकी संस्थान को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार देहरादून निवासी संदीप कुमार व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उत्तराखंड तकनीकी विवि में राज्य सरकार की ओर से बनाए गए प्रथम विनियमन और तकनीकी विवि के संघटक संस्थान महिला प्रौद्योगिकी संस्थान में की जा रही नियुक्तियों को एआईसीटीई व यूजीसी के नियमों के विरुद्ध बताते हुए चुनौती दी थी।
कहा था कि महिला प्रौद्योगिकी संस्थान की निदेशिका को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अपर मुख्य सचिव तकनीकी द्वारा अलग से परिनियमावली बनाई गई है। इसमें सहायक प्रोफेसर की अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष रखी गई है, जबकि राज्य सरकार में अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष है।
यूजीसी, एआईसीटीई में सहायक प्रोफेसर के लिए कोई आयु सीमा निर्धारित नहीं की है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कुलाधिपति, केंद्र सरकार, राज्य सरकार, एआईसीटीई, यूजीसी व तकनीकी विवि एवं महिला प्रौद्योगिकी संस्थान को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि पूर्व में निदेशक की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका में पहले की नियुक्ति पर रोक लग चुकी है।