नाग्निकाल में वायरलेस सिस्टम बेहद महत्वपूर्ण
सूत्रों की मानें तो वन विभाग में वायरलेस सेट से संबंधित सारी व्यवस्था अस्त-व्यस्त है। सालों से लाइसेंस फीस और अन्य शुल्क का भुगतान ही नहीं किया गया है। इस तरह से विभाग के ऊपर करोड़ों रुपये की देनदारी चढ़ी हुई है। विभाग को आज नहीं तो कल यह पैसा केंद्र के डब्ल्यूपीसी विंग में जमा करना ही होगा।
विभाग के पास वायरलेस स्टेशनों और सेट से संबंधित आंकड़ा तो मौजूद है, लेकिन किस स्थिति में हैं और इनका संचालन कैसे हो रहा है, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है, जबकि विभाग में वन और वन्यजीवों की सुरक्षा में वायरलेस सिस्टम का महत्वपूर्ण योगदान है। विशेषकर वनाग्निकाल में वायरलेस सिस्टम बेहद महत्वपूर्ण होता है। सूत्रों की माने तो विभाग के पास ट्रेंड ऑपरेटर भी नहीं हैं, जैसे तैसे विभाग अपना काम चला रहा है।
जोन/मंडल रिपिटर सेट बेस सेट वॉकी-टॉकी मोबाइल सेट जीपीएस
कुमाऊं जोन 11 144 450 61 417
गढ़वाल जोन 35 234 557 89 551
वन्य जीव विहार 12 108 498 48 350
कुल 58 486 1505 198 1318
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यह बात सही है कि लंबे समय से जोन वार वायरलेस सेट से संबंधित डाटा अपडेट नहीं हो पाया है। लाइसेंस फीस, रॉयल्टी आदि जमा की गई है या नहीं, इस संंबंध में फील्ड से डिविजनवार जानकारी जुटाई जा रही, जो भी खामियां होंगी, उन्हें शीघ्र ही दूर किया जाएगा। -डॉ. समीर सिन्हा, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, वन विभाग