विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले सीमांत जनपद में आज भी सरकार सुरक्षित आवाजाही के इंतजाम नहीं कर पायी है। जिले में आपदा से पुल-पुलिया बहने के कारण नौ स्थानों पर ग्रामीण नदियों के आरपार तार के सहारे झूल रही ट्रॉलियों के सहारे आवाजाही करने को मजबूर हैं। जर्जर ट्रॉलियों में अंगुलियां कटने जैसे हादसे आम हैं, जबकि मोरी के सांद्रा सल्ला गांव में ट्रॉली से गिरने के कारण एक बच्ची की मौत हो चुकी है।
पहाड़ी जनपद उत्तरकाशी में गंगा, यमुना एवं टौंस जैसी बड़ी नदियों के साथ ही सहायक नदियों व गाड-गदेरों की भरमार है। जिले के अधिकांश गांवों तक पहुंचने के लिए इन गाड-गदेरों को पार कर जाना पड़ता है।
इन्हें सुरक्षित ढंग से पार करने के लिए पक्की पुलियाओं की जरूरत है, लेकिन दूरस्थ क्षेत्रों में लकड़ी के अस्थायी पुलों के सहारे जोखिम भरी आवाजाही चल रही है। ये अस्थायी पुल भी हर साल बरसात में गाड-गदेरों में उफान आने पर बह जाते हैं।