protest against wine shops in garhwal
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एक ओर राज्य में महिलाएं आबादी में शराब की दुकानें खोलने का विरोध कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर महिलाओं के नाम पर ही शराब बेची जा रही है। प्रदेश में करीब 16 फीसदी शराब की दुकानें महिलाओं के नाम आवंटित हुई हैं। नई आबकारी नीति में शराब की दुकानों के आवेदन से आवंटन तक में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है।
हाईवे से शराब की दुकानें हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सरकार ने तोड़ तो निकाल लिया, लेकिन गली-मोहल्लों में शराब की दुकानें खुलने से खूब हल्ला मचा। दुकानें खुलने से शुरू हुआ विरोध धीरे-धीरे पूर्ण शराबबंदी के आंदोलन में बदल गया। आंदोलन में महिलाओं ने बढ़कर भागीदारी की।
मई में प्रदेशभर में अनेक स्थानों पर आबादी में शराब की दुकानें खोलने का जबर्दस्त विरोध हुआ। महिलाओं ने धरना-प्रदर्शन करने के साथ ही दुकानों में तोड़फोड़ तक की। कारोबारियों और शराबियों को डंडे मारकर दौड़ाया।
मई के आखिर सप्ताह नई आबकारी नीति के तहत शराब की दुकानों के आवंटन के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हुई। प्रदेश में देसी और विदेशी शराब की 526 दुकानों के लिए 26 हजार आवेदन किए गए। इन आवेदकों में महिलाओं की संख्या करीब दस हजार से अधिक रही। आबकारी मुख्यालय के मुताबिक 503 दुकानों का आवंटन किया जा चुका है। औपचारिकताएं पूरी न होने से 23 दुकानें निरस्त कर दी गईं हैं। आवंटित की गई 503 दुकानों में 80 दुकानें महिलाओं के नाम पर हैं।