पीपलकोटी में बिरही रेंज के चीड़ के जंगलों में शनिवार को पांचवें दिन भी आग भड़की रही। आंधी-तूफान होने से आग चट्टानी भाग तक पहुंच गई है। आग से चारों ओर धुंध छा गई है। बिरही क्षेत्र में शनिवार को हल्की बारिश भी हुई, लेकिन बावजूद इसके आग नहीं बुझ पाई है। आग के जंगल के शीर्ष भाग तक पहुंच जाने के कारण वन विभाग के कर्मचारी भी आग को बुझा नहीं पा रहे हैं।
देवलगढ़ में मंदिर परिसर तक पहुंची आग
श्रीनगर में शनिवार को जंगल आग में जलते रहे। देवलगढ़ के मंदिरों और स्कूल तक आग पहुंच गई। जिसको वन विभाग और स्थानीय लोगों की मदद से बुझाया गया। बस्ती के पास तक आग पहुंचने की वजह से लोगों ने शुक्रवार रात जागकर काटी। छह दिनों से अलकनंदा घाटी के जंगल आग की चपेट में हैं। शनिवार रात जीएसटी ऑफिस, एसएसबी फायरिंग रेंज समेत अन्य क्षेत्र आग में घिर गए। लोगों ने पुलिस, राजस्व विभाग और वन विभाग की मदद से आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक जंगल राख हो चुके थे।
वहीं शनिवार को देवलगढ़ क्षेत्र के अखाड़ा, नौली, भटोली व लांगू के जंगलों की आग राजराजेश्वरी मंदिर परिसर देवलगढ़ और प्राइमरी स्कूल तक पहुंच गई। बताया जा रहा है कि आग से बुरांश के पेड़ भी झुलस गए। राजराजेश्वरी मंदिर के पुजारी केपी उनियाल ने बताया कि तीन दिन से क्षेत्र में आग लगी हुई है। आग बुझाने में मंदिर में रह रहे लोगों और पशुपालन विभाग के कर्मचारियों ने भी मदद की। मंदिर परिसर के पास की आग बुझा ली गई है, लेकिन चट्टानी क्षेत्र में अभी भी आग लगी हुई है। इधर, श्रीकोट गंगानाली के ऊपर जंगलों की आग कभी भी बस्ती के समीप पहुंच सकती है।
डांग में फायर बिग्रेड के वाहन के न जाने पर कोतवाल एनएस बिष्ट ने फायर एक्स्टींग्यूशर (अग्निशामक) सिलेंडर भेजे गए। डीएफओ सिविल सोयम संतराम का कहना है कि ज्यादातर क्षेत्रों में आग बुझा ली गई है। टीम लगातार आग बुझाने का काम कर रही है। लगभग ढाई हेक्टेअर जंगल आग से प्रभावित हुआ है। उन्होंने बताया कि एसएसबी फायरिंग रेंज में नियंत्रण के लिए लगाई गई आग फैल गई। जिससे काफी बड़ा क्षेत्रफल प्रभावित हुआ। डीएम डीएस गर्ब्याल ने बताया कि अग्नि प्रभावित क्षेत्रों में एसडीएम श्रीनगर नजर रखे हुए हैं। श्रीनगर तहसील के स्टाफ ने वन विभाग के साथ मिलकर आग बुझायी।