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उत्तराखंड: पारा चढ़ने के साथ धधक रहे जंगल, 24 घंटे में 112 जगहों पर लगी आग 

Wed, 29 May 2019 08:31 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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गर्मी बढ़ने के साथ जंगल में आग धधकने लगी है। बीते 24 घंटों में कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों में कुल 112 जगहों में आग ने भयंकर तबाही मचाई। कुमाऊं क्षेत्र में 45 और  गढ़वाल में यह आंकड़ा 67 स्थानों तक पहुंच गया। 

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वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो राज्य में अब तक आग की कुल 1420 घटनाओं में 1840.595 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है। आग की घटनाओं को काबू पाने को लेकर चलाए गए राहत अभियान के दौरान आठ वनकर्मी भी झुलसकर घायल हो चुके हैं। गढ़वाल क्षेत्र में आग से छह वन्यजीवों की मौत हो चुकी है।

वन विभाग के आपदा एवं वनाग्नि  प्रबंधन के आंकड़ों के मुताबिक कुमाऊं क्षेत्र में अब तक 869 घटनाएं हुई हैं। गढ़वाल क्षेत्र में यह आंकड़ा 487 तक पहुंच गया है। वन्यजीव अभयारण्यों में आग लगने की 64 घटनाएं हो चुकी हैं। वन पंचायतों व सिविल क्षेत्रों में 153 जगहों पर आग लग चुकी है। इस तरह की घटनाओं का आंकड़ा 711 तक पहुंच गया है। वनाग्नि से अब तक 1840.595  हेक्टेयर जंगल स्वाहा हो चुका है। इससे वन विभाग को 3289493 रुपये का नुकसान हो चुका है।
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31 मई तक और होगी तबाही
मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने संभावना जतायी है कि 31 मई तक तापमान में और अधिक बढ़ोतरी होगी। ऐसे में जंगलों में आग लगने की घटनाओं में और अधिक बढ़ोतरी होगी। ऐसे में वनाधिकारियों, कर्मचारियों को और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

1437 क्रू स्टेशन, 174 वाच टावरों से निगरानी
जंगलों को आग से बचाने के लिए वन निदेशालय में अत्याधुनिक नियंत्रण कक्ष स्थापित कर दिया गया है। राज्य में 1437 क्रू स्टेशन की व्यवस्था की गई है। सभी क्रू स्टेशन में सात कर्मचारियों की तैनाती है। इसके अलावा राज्य में 174 वाच टावर स्थापित किए गए हैं। तत्काल जानकारी के लिए प्रभागीय मास्टर कंट्रोल रूम, रेंज कार्यालयों, क्रू स्टेशन और फील्ड स्टाफ  को वायरलेस सेट मुहैया कराए गए हैं। इसके अलावा फारेस्ट सर्वे ऑफ  इंडिया से एसएमएस द्वारा फायर अलर्ट प्राप्त करने की सुविधा शुरू की गई है। सभी 40 प्रभागीय वनाधिकारियों के मुख्यालयों में मास्टर कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है। इसके अलावा संवेदनशील व अतिसंवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है।

साल  घटनाएं       नुकसान हेक्टेयर में
2010   789              1610.82
2011  150               231.75
2012  1328             2823.09
2013  245               384.05
2014  515               930.33
2015   412                701.61         
2016   2074              4437.75
2017  805               1244.64
2018  2151              4480.04
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टिहरी जंगलों में भड़की आग नहीं हो पा रही काबू 

नई टिहरी में तापमान बढ़ने के साथ ही वन विभाग की परेशानियां भी बढ़ती जा रही है। चारों ओर जंगलों में भड़क रही आग पर काबू पाना वन विभाग के लिए खासा मुश्किल हो रहा है। जिससे वातावरण में धूंध ही धूंध फैल गई है। यहां जिला मुख्यालय से कुछ दूर कंडाखोली के जंगल में सोमवार सायं पांच बजे वनाग्रि भड़क गई। उस क्षेत्र में जंगल रातभर धधकते रहे। सुबह के समय आग बुडोगी गांव से होते हुए ढाईजर से आगे बैकरी के नजदीक पहुंच गई।

वन विभाग ने आग बुझाने के लिए अग्रिशमन का सहयोग भी लिया। बावजूद मंगलवार देर सांय तक जंगल की आग नहीं बुझ पाई। रानीचौरी के जंगलों में भी आग काबू नहीं हो पाई। डीएफओ डा. कोको रोसे का कहना है, कि जंगलों की आग काबू करने के लिए वन कर्मी मौके पर मौजूद हैं, एक जगह आग काबू करने पर दूसरी जगह भड़क रही है। उन्होंने बताया कि आग बुझाने जंगल में गया फायर वाचार राहुल पिरूल में फिसल कर चोटिल हो गया। अस्पताल में उपचार के बाद उसे आराम दिया गया है। डीएफओ ने आम लोगों से जंगलों को आग से बचाने की अपील की है।
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