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एक दिन पहले हुई मॉक ड्रिल, जब सच में लगी आग तो सोता रहा सरकारी सिस्टम

Fri, 21 Apr 2017 10:09 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हरिद्वार 
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जंगलों को आग से बचाने के लिए किए गए पूर्वाभ्यास के एक दिन बाद ही जिला प्रशासन, वन विभाग और दूसरे अन्य विभागों की पोल खोल गई। शुक्रवार को चंडीदेवी मंदिर के पास जंगल में लगी आग से यह साफ हो गया कि प्रशासन और दूसरे विभागों के अधिकारी सरकार की ओर से घोषित कार्यक्रम को किस तरह से खानापूर्ति करके पूरा करते हैं।
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जंगल करीब डेढ़ घंटे तक जलता रहा है और विभाग सोते रहे। करीब डेढ़ घंटे तक दो कर्मचारी ही आग बुझाने के लिए जूझते रहे। बार बार सूचना देने पर भी कोई रेस्क्यू टीम मौके पर नहीं पहुंची। ऐसे में आने वाले दिनों में जंगल की आग बढ़ने की आशंका के बीच इससे निपटने के प्रयासों पर भी सवाल उठने लगे है।       

शुक्रवार की दोपहर करीब 11 बजे चंडीदेवी मंदिर के पास जंगल में श्यामपुर बीट क्षेत्र में आग लग गई। देखते ही देखते तेज गर्मी के बीच आग काफी दूर तक फैल गई। जिस पर बीट इंचार्ज रामतेज तिवारी, चौकीदार बालेश्वर के साथ मौके पर पहुंचे और आग बुझाने का प्रयास किया। तेज धूप और हवा के कारण आग पर काबू पाना मुश्किल हो रहा था।
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कर्मचारियों ने पहले श्यामपुर रेंज कार्यालय और इसके बाद हरिद्वार स्थित डीएफओ और रोशनाबाद स्थित जिलाधिकारी कार्यालय पर भी सूचना दी। कंट्रोल रूम को भी सूचित किया गया।  प्रशासन के दावों की एक दिन बाद ही उस समय पोल खुल गई जब करीब डेढ़ घंटे तक भी कोई नहीं पहुंचा।
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धरातल पर प्रशासनिक तंत्र फेल      

बीट अधिकारी और चौकीदार अकेले ही जूझते रहे। आग लगी देखकर आसपास के लोग भी एकत्रित हुए। प्रशासन द्वारा बताए गए फोन नंबरों पर सूचना देने की भी कोशिश की गई लेकिन अधिकारियों के फोन तक भी नहीं उठे।

डेढ़ घंटे बाद वन क्षेत्राधिकारी यशपाल सिंह राठौर, वन दारोगा रविशंकर दुबे और कुछ अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचे। इसके बाद ही आग पर काबू पाया जा सका। तक काफी जंगल जल चुका था।      

 जंगल की आग से निपटने के लिए प्रशासन ने बृहस्पतिवार को तीन स्थानों पर मंसा देवी, चंडी देवी मंदिर के पास बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर खुद को पास होने का दावा किया था। अधिकारियों ने दलील दी थी कि वन विभाग के अधिकारियों की अगुवाई में पूरा जिला प्रशासन खास तौर पर आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी जंगल की आग पर काबू पाने में मुस्तैद रहेंगे। शुक्रवार को जब वास्तव में आग लगी तब प्रशासन के दावे हवा हवाई हुए। 
 बृहस्पतिवार को खुद ही अपनी पीठ थपथपाने वाले अधिकारी वास्तव में कितने गंभीर है यह शुक्रवार की आग की घटना से पता चल गया है। यदि यही आलम रहा तो जंगलों को आग से बचाना मुश्किल है। आपदा प्रबंधन का कागजों पर खाका खींचने वाले अधिकारियों को धरातल पर इतनी ही मुस्तैदी दिखानी होगी जितनी दफ्तरों में बैठक और वीडियो कांफ्रेसिंग के दौरान सवाल जवाब के बीच दिखाई देती है।

जंगल की आग बुझाने के लिए बनाए गए तंत्र के मुखिया डीएफओ एचके सिंह से जब आग लगने के दौरान किसी भी अधिकारी के समय से न पहुंचने के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि उन्होंने वन क्षेत्राधिकारी श्यामपुर को कर्मचारी के साथ मौके पर भेजा था और आग पर काबू पाया गया। 
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