कोटद्वार में द्वारीखाल ब्लाक के ग्राम पाली में बेकाबू हुई जंगल की आग गांव तक पहुंच गई। तीन गोशालाएं आग की भेंट चढ़ गई। वनाग्नि पर काबू पाने और मवेशियों को बचाने की कोशिश में आठ ग्रामीण झुलस गए। कई मवेशी भी जल गए। पाली गांव में सोमवार दोपहर को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब जंगल से धधकती हुई आग गांव के करीब पहुंच गई। पेड़ों पर लगाए गए घास की गट्ठर पर लगी आग ने विकराल रूप ले लिया और आसपास की गोशालाएं भी आग की चपेट में आ गई। मवेशियों को बचाने और आग बुझाने की कोशिश में आठ ग्रामीण भी आग से झुलस गए। ग्रामीणों ने किसी तरह आग बुझाई, लेकिन तब तक तीन गोशालाएं पूरी तरह जलकर राख हो गईं।
आग में झुलसे गिरजा दत्त, शांति देवी, विनोद कुमार, निकिता, सुधाकर, जयप्रकाश, रेश्मा देवी व वासुदेव ने वन विभाग पर जंगल की आग पर काबू नहीं करने का आरोप लगाया। कहा कि दो दिन से गांव के नजदीक के जंगल सुलग रहे थे। उन्होंने इसकी सूचना वन विभाग को दे दी थी, लेकिन आग बुझाने के लिए एक भी वनकर्मी नहीं आया। उन्होंने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। उधर, कोटद्वार रेंज अधिकारी एसपी कंडवाल ने बताया कि उन्हें पाली गांव में गोशालाओं में आग लगने की सूचना लोगों से मिली है। मामला सिविल वन क्षेत्र का है। राजस्व विभाग की ओर से इसकी मुआवजे की कार्रवाई की जाएगी। उधर, तहसीलदार सीएस रावत ने बताया कि उन्हें अभी पाली गांव में जंगल की आग लगने की जानकारी नहीं मिली है। मौके पर कर्मचारियों को भेजकर घटना की जानकारी ली जाएगी।
उत्तरकाशी में एक हफ्ते से सुलग रहे जंगल
इस बार सर्दियों में अपेक्षित बारिश और बर्फबारी नहीं होने से अब गर्मी बढ़ते ही जंगल धधकने लगे हैं। जिले के विभिन्न हिस्सों में बीते एक हफ्ते से जंगल सुलग रहे हैं। चालू फायर सीजन में अभी तक करीब 15 हेक्टेयर वन क्षेत्र स्वाह हो चुका है। मुखेम रेंज के मीरा कोट, पोखरी, अठाली, दिलसौड़, चामकोट क्षेत्र के जंगल में लगी आग से वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा हैं। डुंडा के माजफ, डांडा, हिटाणु, पुजारगांव, धरासु के क्वाटा, बमंटी, कोट, मुखेम रेंज के बौंगा, भैलुड़ और बड़कोट के डंडाल गांव क्षेत्र के जंगलों में लगी आग अभी पूरी तरह काबू में नहीं आ पायी है। डीएफओ संदीप कुमार ने बताया कि वन कर्मियों की टीमें जंगलों में लगी आग पर काबू पाने में जुटी हैं। इसमें एसडीआरएफ, राजस्व एवं निम का भी सहयोग लिया जा रहा है। जमीन में नमी नहीं होने की वजह से आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं।
रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के जंगल वनाग्नि की चपेट में हैं। आग से पूरे क्षेत्र में घनी धुंध छाई हुई है। सोमवार देर शाम को दक्षिणी रेंज जखोली के अंतर्गत माई की मढ़ी में वनाग्नि बस्ती क्षेत्र तक पहुंच गई। स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। उत्तरी रेंज की भरदार पट्टी के नाग-धारकोट सहित कई गांवों के जंगल दो दिनों आग से धधक रहे हैं। अगस्त्यमुनि रेंज के धनपुर व बच्छणस्यूं क्षेत्र के जंगलों में भी आग लगी हुई है। इधर, जिला मुख्यालय से लगी ग्राम पंचायत बर्सू के औंण तोक के जंगल मंगलवार दोपहर से धधक रहे हैं। रेंजर आलोकी ने बताया कि वनाग्नि को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ अराजक तत्वों द्वारा इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है, जिससे वन संपदा को नुकसान हो रहा है। साथ ही प्रदूषण भी हो रहा है। भिलंगना ब्लॉक क्षेत्र के मयकोट, कोठियाडा, तुंगाडा, नैलचामी और ओडाधार गांव के जंगल दिनभर आग से धधकते रहे। आग लगने से लाखों रूपये की वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। चारों तरफ धुआ ही धुआ फैला हुआ है। हालांकि वन कर्मी आग बुझाने में जुटे हुए है। लेकिन आग विकराल होने के चलते वन कर्मियों को जूझना पड़ रहा है।
वनों में आग लगने की घटनाओं में कुछ कमी आई है, लेकिन खतरा बरकरार है। मंगलवार को प्रदेश में 50 जगह आग लगने की घटना हुई है। वहीं, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार को वनाग्नि की घटनाओं के मद्देनजर समीक्षा बैठक बुलाई है। गर्मी के चलते जंगल बारूद के ढेर बने हुए हैं, जहां छोटी से चिंगारी से जंगलों में आग लग रही है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 21 मई की तुलना में मंगलवार को आग लगने की कुछ घटनाएं कम हुई है, लेकिन चुनौती जस की तस बनी हुई है। राज्य में 50 जगह जंगलों में आग लगी थी, जिसमें 49 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है।
मुख्य वन संरक्षक व नोडल अधिकारी वनाग्नि नियंत्रण बीपी गुप्ता के अनुसार अभी तक प्रदेश में 767 आग लगने की घटनाओं में 1253 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंच चुका है। इसमें 21 हेक्टेयर का प्लांटेशन वाला एरिया भी है। आग की दृष्टि से गढ़वाल मंडल सबसे ज्यादा संवेदनशील बना हुआ है, जहां पर 485 घटनाएं हुई हैं। कुमाऊं मंडल में 238 और वाइल्ड लाइफ एरिया में 44 घटना रिपोर्ट हो चुकी है। इन घटनाओं में 21 लाख 89 हजार से ज्यादा की जैव विविधता को नुकसान पहुंचने का अनुमान है।
मंगलवार को आग लगने की घटनाओं में मामूली सुधार हुआ है पर खतरा बरकरार है। वहीं, वनों में आग लगने की घटनाओं के मद्देनजर सीएम ने समीक्षा बैठक बुलाई है। वह वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी डीएम, डीएफओ और सीएमओ समेत अन्य अफसरों को वनाग्नि घटना और उसके नियंत्रण को लेकर चल रहे अभियान के संबंध में जानकारी प्राप्त करेंगे।