गंगोत्री नेशनल पार्क के वन्यजीवों को सैलानियों की इन चीजों से खतरा पैदा हो रहा है। सामने आया है कि सैलानियों के जूते और वाहनों के टायरों से भी खतरा है। वन विभाग ने भरल (ब्लूशीप) की बीमारी से निपटने को लेकर एक एक्शन प्लान तैयार किया है, उसमें बीमार भरल के इलाज से लेकर बाहर से आने वाले संक्रमण के खतरे को कैसे कम किया जा सकता है, उसका जिक्र है। इस एक्शन प्लान को एनजीटी में जमा भी कर दिया गया है।
उच्च हिमालय क्षेत्र के भरल की आंखों में गंभीर बीमारी रिपोर्ट हुई थी। बाद में यह मामला एनजीटी में पहुंचा। भरल में आंखों की बीमारी को लेकर एनजीटी ने कड़ा रुख अख्तियार किया हुआ है। इसके बाद वन विभाग, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया ने बीमारी से निपटने को लेकर एक एक्शन प्लान बनाया है।
इसमें बीमार भरल के लिए इलाज के लिए आइसोलेशन वार्ड बनाया जाएगा। इसके अलावा वैज्ञानिक बीमारी के कारणों का भी पता करेंगे। इसके अलावा गंगोत्री नेशनल पार्क आने वाले सैलानियों के माध्यम से भी कोई इंफेक्शन न पहुंचे, इसकी भी योजना तैयार की है।
जो भी सैलानी गंगोत्री नेशनल पार्क में आएगा, उसके जूतों को संक्रमण रहित किया जाएगा। यही नहीं सैलानियों के वाहनों के टायर तकको भी संक्रमणरहित करने की मंशा है। हालांकि यह व्यवस्थाएं कितनी कारगर होंगी, उसको लेकर विशेषज्ञों को भी संदेह है। बहरहाल, मामला एनजीटी में होने के कारण अफसर मामले में ज्यादा बातचीत करने से बच रहे हैं। प्रमुख वन संरक्षक(वन्यजीव) डीवीएस खाती ने एक्शन प्लान तैयार होने की पुष्टि की है। उनके अनुसार बीमारी से निपटने और फैलाव को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं।